यरुशलम | इजराइल के दक्षिणपंथी मंत्री इतामार बेन-गवीर रविवार को यरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद परिसर में पहुंचे और पुलिस सुरक्षा में खुलेआम पूजा की, जिससे नए विवाद की चिंगारी भड़क उठी। इस कदम को ना सिर्फ फिलिस्तीनी नेतृत्व, बल्कि जॉर्डन और सऊदी अरब ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है।
बेन-गवीर की यह यात्रा उस वक्त हुई जब गाजा में इजरायली कार्रवाई के दौरान 27 फिलीस्तीनियों की मौत हो गई और कई अस्पताल भुखमरी के हालात से जूझ रहे हैं। पहले से ही मानवीय संकट झेल रहे गाजा में इस घटनाक्रम ने और तनाव बढ़ा दिया है।
दुनियाभर से इजराइल पर निशाना
इजराइल की आलोचना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है। गाजा में युद्धविराम के लिए चल रही मध्यस्थता की कोशिशों को बेन-गवीर के इस कदम से गहरा झटका लग सकता है।
जॉर्डन, जो अल-अक्सा मस्जिद का आधिकारिक संरक्षक है, ने कहा कि यह हरगिज़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमास ने भी इसे “फिलिस्तीनियों पर नई आक्रामकता” बताया है।
क्यों खास है अल-अक्सा मस्जिद?
अल-अक्सा इस्लाम का तीसरा सबसे पवित्र स्थल माना जाता है, जबकि यहूदियों के लिए यह स्थान ‘टेम्पल माउंट’ के नाम से महत्वपूर्ण है। पुराने समझौते के तहत, यहूदियों को परिसर में जाने की इजाजत तो है, लेकिन पूजा करने की नहीं।
माना जा रहा है कि मंत्री बेन-गवीर का इस तरह खुलेआम पूजा करना इजराइल की नीति में बदलाव का संकेत हो सकता है। सोशल मीडिया पर उनके दौरे के वीडियो और फोटो वायरल हो चुके हैं।
कौन हैं इतामार बेन-गवीर?
बेन-गवीर कट्टरपंथी यहूदी राजनीति का चेहरा माने जाते हैं। मंत्री बनने से पहले भी वह कई बार अल-अक्सा परिसर का दौरा कर चुके हैं, लेकिन यह पहली बार है जब उन्होंने बतौर मंत्री वहां जाकर पूजा की और पुराना समझौता तोड़ने जैसे संकेत दिए।
फिलिस्तीनी अथॉरिटी ने इसे “रेड लाइन पार करना” बताया है। अब सवाल यह है कि क्या यह एक धार्मिक आस्था का प्रदर्शन था या जानबूझकर तनाव बढ़ाने की रणनीति? जवाब आने वाले दिनों में सामने आ सकता है, लेकिन फिलहाल हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।