चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने ‘राज्य तिलहन मिशन’ का गठन किया है, जिसके तहत सरसों, मूंगफली, सूरजमुखी और सोयाबीन जैसी तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाएगी। कृषि विभाग ने इस मिशन का नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है।
मिशन के तहत किसानों को बेहतर बीज, नई तकनीक और सिंचाई सुविधाओं के साथ-साथ उनकी उपज को बाजार और उद्योगों से जोड़ने की गारंटी भी मिलेगी। सरकार ने कहा है कि उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और बिक्री तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत किया जाएगा।
इस मिशन में प्रशासनिक अधिकारियों, कृषि विशेषज्ञों, उद्योगपतियों के साथ-साथ किसान संगठन और सहकारी समितियों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मिशन के सदस्य सचिव होंगे। नीतियों और फैसलों में किसानों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
मिशन के अन्य सदस्यों में सहकारिता, उद्योग, ग्रामीण विकास, वित्त, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभागों के सचिव शामिल होंगे। इसके साथ ही हिसार के चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के निदेशक, हरियाणा स्थित ICAR संस्थानों के निदेशक, NABARD के राज्य प्रभारी और राज्य स्तरीय बैंकर समिति के नोडल अधिकारी भी मिशन का हिस्सा होंगे।
मिशन में तिलहन उत्पादक किसान संगठन, सहकारी समितियों के प्रतिनिधि, तिलहन, वनस्पति तेल और बीज उत्पादन से जुड़े उद्योग प्रतिनिधि और केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
हरियाणा सरकार का यह कदम देश की आयात निर्भरता कम करने और किसानों को तिलहन की खेती से अधिक मुनाफा दिलाने की दिशा में अहम साबित होगा। ‘राज्य तिलहन मिशन’ साल में दो बार बैठक करेगा और फसलवार क्षेत्र, उत्पादन, औसत उपज और तेल उत्पादन जैसे प्रमुख संकेतकों पर निगरानी रखेगा। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा।