अमेरिका | भारत के प्रमुख टेक्सटाइल हब — नोएडा, सूरत और तिरुपुर — अमेरिकी टैरिफ की मार झेल रहे हैं। अमेरिका ने भारतीय वस्त्र उत्पादों पर कुल 50% आयात शुल्क लगा दिया है, जिससे कपड़ा निर्यात की वैश्विक प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो रही है।
फैक्ट्रियों में ठहराव:
बढ़ती लागत और उच्च टैरिफ के कारण कई निर्माता उत्पादन रोकने को मजबूर हैं। FIEO के अनुसार, कई यूनिट्स ने संचालन स्थगित किया है, जिससे भारत वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से पीछे छूट रहा है।
लाखों नौकरियां संकट में:
वस्त्र उद्योग के साथ ही चमड़ा, सेरामिक्स, केमिकल, हैंडक्राफ्ट और कालीन जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले लाखों श्रमिकों की रोज़ी-रोटी प्रभावित होने का खतरा है।
सीफूड निर्यात भी प्रभावित:
भारत के समुद्री उत्पाद, विशेषकर झींगे का निर्यात भी प्रभावित हो रहा है। अमेरिका भारत के सीफूड निर्यात का लगभग 40% बाजार है, जिससे स्टोरेज, लॉजिस्टिक्स और किसानों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
उद्योग संगठनों की मांगें:
FIEO ने सरकार से कम ब्याज दर पर एक्सपोर्ट क्रेडिट और ऋण पर moratorium की मांग की है। CITIके चेयरमैन राकेश मेहरा ने इसे रोजगार सुरक्षा और देश के आर्थिक लक्ष्यों से जोड़ा है।
भारत-अमेरिका वार्ता से उम्मीद:
FIEO का मानना है कि उच्च स्तरीय व्यापारिक वार्ता से वस्त्र और अन्य निर्यात क्षेत्रों को राहत मिल सकती है। नीति और वित्तीय हस्तक्षेप में देरी उद्योग की स्थिति और गंभीर कर सकती है।