शंघाई | चीन के तियानजिन में संपन्न हुए शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाग लिया। समिट के समापन के बाद पीएम मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने तियानजिन के होटल रिट्ज कार्लटन में विशेष द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं के प्रतिनिधिमंडल भी बैठक में मौजूद रहे।
अमेरिका के दबाव के बीच अहम बैठक
बैठक की अहमियत इस वजह से और बढ़ गई क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल आयात को लेकर भारत पर दबाव बनाया हुआ है। अमेरिका ने रूस से तेल आयात पर भारत को 50 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया है और अगर खरीद जारी रही तो 25 प्रतिशत पेनल्टी का खतरा भी है। ऐसे में मोदी-पुतिन की यह मुलाकात रणनीति तय करने और दो देशों के व्यापारिक व राजनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिहाज से निर्णायक मानी जा रही है।
वार्ता के प्रमुख मुद्दे
बैठक में ऊर्जा सहयोग, रक्षा क्षेत्र में साझेदारी, आर्थिक व्यापारिक संबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रमुखता दी गई। विशेष रूप से रूस से तेल आयात और अमेरिका के दबाव से निपटने की रणनीति पर चर्चा हुई। इसके अलावा अफगानिस्तान, मध्य एशिया और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग जैसे मुद्दे भी शामिल थे।
मोदी-शी जिनपिंग बैठक
इससे पहले पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने सीमा विवाद समेत अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। शी जिनपिंग ने भारत और चीन के बीच शांति बनाए रखने पर जोर दिया और इसे ‘हाथी-ड्रैगन’ दोस्ती करार दिया। दोनों देशों ने विश्वास बढ़ाने के लिए कई समझौतों पर सहमति जताई।
भारत-रूस संबंधों को नई दिशा
मोदी और पुतिन की यह बैठक भारत-रूस संबंधों को नई दिशा देने वाली बताई जा रही है। रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के चलते दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंध और मजबूत हुए हैं। तियानजिन वार्ता के बाद उम्मीद है कि भारत और रूस अपने हितों की रक्षा करेंगे और अमेरिका के दबाव के बावजूद दोस्ती को और गहरा करेंगे।