Shimla, Sanju
केंद्र सरकार ने जीएसटी स्लैब में बड़ा बदलाव करते हुए कर ढांचे को सरल बना दिया है। पहले जीएसटी के चार स्लैब—28%, 18%, 12% और 5%—थे, जिन्हें घटाकर अब सिर्फ 5% और 18% कर दिया गया है। इस फैसले से आम लोगों को राहत मिलेगी और कई आवश्यक वस्तुएं सस्ती होंगी।हालांकि, इस बदलाव से राज्यों को राजस्व का नुकसान उठाना पड़ेगा। हिमाचल प्रदेश को ही करीब 1000 करोड़ रुपये का घाटा होने की आशंका जताई जा रही है।
हिमाचल प्रदेश के उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि जीएसटी काउंसिल का निर्णय स्वागत योग्य है क्योंकि इससे उपभोक्ताओं को सीधी राहत मिलेगी। लेकिन राज्य सरकार की आय पर इसका असर होगा। मुख्यमंत्री ने भी इस मुद्दे पर वित्त मंत्री से बातचीत की है और केंद्र से घाटे की भरपाई की मांग की है।चौहान ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के चलते हिमाचल पहले से ही आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। वर्ष 2023 में राज्य को करीब 10 हजार करोड़ का नुकसान हुआ था, जिसके बदले केंद्र सरकार से केवल 1500 करोड़ की मदद मिली। इस साल भी अब तक साढ़े तीन हजार करोड़ का नुकसान हो चुका है। ऐसे में जीएसटी कटौती से खजाने पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा।उन्होंने कहा कि आपदा और औद्योगिक नुकसान को देखते हुए केंद्र सरकार को हिमाचल की विशेष सहायता करनी चाहिए, ताकि विकास कार्य प्रभावित न हों और प्रभावित लोगों को समय पर राहत मिल सके।