काबुल | अफगानिस्तान एक बार फिर भूकंप के झटकों से हिल गया। शुक्रवार तड़के सुबह 3:16 बजे देश के पूर्वी हिस्से में 4.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। बीते 24 घंटों में यह तीसरा झटका है। इससे पहले गुरुवार देर रात 6.2 और बुधवार को 4.8 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया था। लगातार झटकों से राहत-बचाव कार्य प्रभावित हो रहे हैं और लोगों में गहरी दहशत है।
31 अगस्त का विनाशकारी भूकंप
31 अगस्त की रात कुनार प्रांत में आए 6.0 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी। इसका केंद्र जलालाबाद से 27 किलोमीटर दूर और 10 किलोमीटर गहराई में था। झटके पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद तक महसूस किए गए।
तालिबान सरकार के अनुसार, इस भूकंप से अब तक 2,205 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3,600 से अधिक घायल हैं। मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है क्योंकि कई शव अब भी मलबे में दबे हैं।
मिट्टी और लकड़ी के घर बने काल
कुनार, नंगरहार, लगमन और नूरिस्तान जैसे प्रांतों में ज्यादातर मकान मिट्टी, लकड़ी और कच्ची ईंटों से बने थे। शक्तिशाली झटकों को ये इमारतें झेल नहीं सकीं और पूरी तरह ढह गईं। कई गांव मलबे में तब्दील हो गए। राहत पहुंचाने में भी दिक्कतें आ रही हैं क्योंकि:
- सड़कों पर भूस्खलन हुआ है,
- मोबाइल नेटवर्क कमजोर है,
- और यातायात के साधन सीमित हैं।
बचाव कार्य और चुनौतियां
तालिबान प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने बताया कि बचाव कार्य तेज़ी से जारी हैं। प्रभावितों के लिए अस्थायी तंबू लगाए गए हैं, प्राथमिक उपचार और खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। लेकिन खराब रास्ते, संसाधनों की कमी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध बड़ी बाधा बने हुए हैं। तालिबान प्रशासन ने वैश्विक समुदाय से आपातकालीन मदद मांगी है।
दुनिया की मदद
कतर, भारत, ईरान, तुर्की, पाकिस्तान, चीन और यूएई जैसे देशों ने राहत सामग्री भेजी है। संयुक्त राष्ट्र ने भी तुरंत 5 मिलियन डॉलर की सहायता जारी की और मानवीय मिशन सक्रिय किए हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि केवल तत्काल राहत ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक पुनर्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना होगा।
आफ्टरशॉक्स का खतरा बरकरार
भूकंप विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में और आफ्टरशॉक्स आ सकते हैं। इससे पहले से जर्जर इमारतें ढह सकती हैं, राहत कार्य प्रभावित होंगे और लोगों का भय और गहरा सकता है।