Kullu, Manminder
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के उपमंडल बंजार की तीर्थन घाटी में हाल की भारी बारिश के बाद भूस्खलन से हालात बिगड़ गए हैं। कई गांव धंसने की कगार पर हैं और सबसे गंभीर स्थिति शर्ची पंचायत के बंदल गांव की है। यहां 28 घर खाली कराए जा चुके हैं और ग्रामीण पिछले 15 दिन से बेघर होकर टैंटों व रिश्तेदारों के घरों में रह रहे हैं।
सड़क टूटने के कारण घाटी का बाहरी दुनिया से संपर्क कट गया है। बिजली–पानी की आपूर्ति ठप है और अब खाने-पीने का सामान भी खत्म होने लगा है। हालात ऐसे हैं कि न तो जरूरी सामान गांव तक पहुंच पा रहा है और न ही लोग बाहर निकल पा रहे हैं।
ग्रामीणों की आपबीती
स्थानीय युवक पवन सिंह ने बताया कि बंदल गांव में कुल 37 घर हैं, जिनमें से 28 को प्रशासन ने खाली कराया है। उन्होंने कहा, “लोग अस्थायी टैंटों और रिश्तेदारों के घरों में शरण लिए हुए हैं। कुछ को प्रशासन ने तिरपाल दिए हैं, बाकी परिवार अभी भी 2023 की आपदा में मिले पुराने टैंटों में रह रहे हैं।”
वहीं अधिवक्ता लोत राम ने कहा कि “2023 में ही बंदल गांव को रेड ज़ोन घोषित किया गया था, लेकिन ठोस कदम नहीं उठाए गए। आज फिर कई परिवार बेघर हो चुके हैं। प्रशासन को सबसे पहले प्रभावितों को राहत देनी चाहिए और फिर सड़क व सुविधाएं बहाल कर स्थायी विस्थापन की योजना बनानी चाहिए।”
घाटी की 10 पंचायतें संपर्कविहीन
यह संकट सिर्फ बंदल गांव तक सीमित नहीं है। तीर्थन घाटी की 10 पंचायतें—नोहांडा, पेखड़ी, तूंग, शर्ची, कंढीधार, मशियार, शिल्ही, शिरीकोट और कलबारी—भी संपर्कविहीन हो चुकी हैं। एक महीने से सड़क सुविधा ठप रहने के कारण आटा, चावल, दाल, तेल, चीनी, नमक, सब्ज़ियां और मोमबत्तियां तक गांवों में उपलब्ध नहीं हैं। लोग जरूरी सामान के लिए खतरनाक पहाड़ी रास्तों और उफनते नालों को पार करने को मजबूर हैं।
शर्ची पंचायत की प्रधान रामेश्वरी देवी ने कहा, “बंदल, बाड़ीघार और शियाशाडू गांव में कई मकान खतरे की जद में हैं। बंदल गांव के 28 घर खाली कराए जा चुके हैं और लोग अस्थायी रूप से टैंट या रिश्तेदारों के घरों में रह रहे हैं। प्रभावित परिवारों के स्थायी विस्थापन की जरूरत है।”
प्रशासन की प्रतिक्रिया
कुल्लू की उपायुक्त तोरूल एस. रवीश ने कहा कि तीर्थन घाटी के बंदल गांव में भूस्खलन से नुकसान हुआ है।प्रभावित परिवारों की हरसंभव मदद की जा रही है। राहत कार्य तेज किए गए हैं और राशन सहित अन्य जरूरी सामान गांव तक पहुंचाया जा रहा है।