नई दिल्ली | रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कच्छ के लक्की नाला सैन्य छावनी में आयोजित बहु-एजेंसी क्षमता अभ्यास के दौरान स्पष्ट चेतावनी जारी की कि सर क्रीक सीमा क्षेत्र में पाकिस्तान द्वारा किया गया कोई भी दुस्साहस भारत की ओर से ऐसा निर्णायक जवाब पाएगा कि उसका ऐतिहासिक और भौगोलिक प्रभाव भी स्पष्ट होगा। उन्होंने कहा कि भारत ने बार-बार बातचीत से समस्या सुलझाने की कोशिश की, पर पाकिस्तान की हालिया सैन्य गतिविधियाँ चिंताजनक हैं।
सीमा पर पाकिस्तानी गतिविधियाँ और भारत की सतर्कता
रक्षा मंत्री ने सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि सर-क्रीक इलाके में सीमा विवाद को हवा दी जा रही है और पाकिस्तान ने इलाके के नज़दीक अपने सैन्य ढांचे को बढ़ाया है, जिससे उसकी मंशा पर सवाल उठते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) मिलकर देश की सीमाओं की सुरक्षा कर रहे हैं और किसी भी चुनौती का जवाब देने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं।
निर्णायक जवाब की चेतावनी
सिंह ने कहा, “यदि सर क्रीक क्षेत्र में पाकिस्तान की ओर से कोई दुस्साहस किया गया तो उसे इतना निर्णायक जवाब मिलेगा कि इतिहास और भूगोल दोनों बदल जाएंगे।” उन्होंने 1965 के युद्ध का हवाला देते हुए कहा कि तब भारतीय सेना ने लाहौर तक पहुँचने की अपनी क्षमता दिखायी थी और आज स्थिति में भारत की क्षमताएँ और भी सुदृढ़ हैं। रक्षा मंत्री ने कराची की ओर संभावित मार्ग का जिक्र करते हुए कहा कि इतिहास और भूगोल के सन्दर्भ में यह बात महत्वपूर्ण मानी जानी चाहिए।
ऑपरेशन सिंदूर का ज़िक्र—सशस्त्र बलों की तत्परता
राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि उस अभियान के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने आतंकवाद और संप्रभुता को चुनौती देने वाले प्रयासों को नाकाम किया और अपने रोज़गार-संबंधी, पहचान एवं बेअसर करने की क्षमता का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि भारतीय बलों ने पाकिस्तानी वायु रक्षा तंत्र को बेनकाब कर दिया और आवश्यक सैन्य उद्देश्य हासिल किए, पर साथ ही संयम भी दिखाया गया क्योंकि अभियान का उद्देश्य युद्ध छेड़ना नहीं, बल्कि आतंकवादी खतरों को बेअसर करना था।
सैन्य, साइबर और आर्थिक तैयारियाँ पर जोर
रक्षा मंत्री ने जवानों से कहा कि नई तकनीकों को अपनाकर और सतर्क रहकर चुनौतियों का सामना करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अब युद्ध के निर्णय महीनों-साल में नहीं, बल्कि घंटों-सेकंडों में निर्धारित होते हैं—इसलिए सायबर युद्ध से निपटने की रणनीति और तीनों सेनाओं के समन्वय पर विशेष बल दिया जा रहा है।