चीन | चीन की पूरी तरह स्वचालित “रोबोटिक फैक्ट्रियों” ने वैश्विक उद्योग जगत में तहलका मचा दिया है। पश्चिमी देशों की ऑटोमोबाइल और ग्रीन एनर्जी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी हाल ही में चीन दौरे पर गए और उन्होंने “डार्क फैक्ट्रीज़” का अवलोकन किया, जहां उत्पादन पूरी तरह रोबोट्स द्वारा होता है, बिना किसी इंसानी हस्तक्षेप के, बिना रोशनी और ब्रेक के।
फोर्ड कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश इस तकनीकी प्रतिस्पर्धा में तेजी नहीं लाते, तो भविष्य में उनके उद्योग की सफलता खतरे में पड़ सकती है। वहीं, फोर्टेस्क्यू ग्रुप के अरबपति संस्थापक एंड्रयू फॉरेस्ट ने कहा कि उन्होंने चीन दौरे के बाद अपनी इलेक्ट्रिक वाहन परियोजनाओं को स्थगित कर दिया है।
उनके अनुसार, “वहां कोई इंसान नहीं है, सब कुछ रोबोटिक है।” विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन का यह कदम सिर्फ मुनाफा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि घटती श्रम शक्ति और बदलती जनसांख्यिकी का समाधान भी है। चीन में बुजुर्ग आबादी तेजी से बढ़ रही है और युवाओं की संख्या घट रही है, ऐसे में पूरी तरह रोबोट-आधारित उत्पादन मॉडल उनके लिए अनिवार्य बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिमी देश तकनीकी स्वचालन की इस रफ्तार को नहीं पकड़ पाते, तो आने वाले दशक में एशियाई फैक्ट्रियां वैश्विक उत्पादन का केंद्र बन जाएंगी।