16 October, 2025
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि तेज आवाज़ और लंबे समय तक म्यूजिक सुनने से आंतरिक कान की तंत्रिका कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त हो सकती हैं, जिससे शोर-जनित श्रवण हानि (NIHL) और टिनिटस (कानों में बजना या भिनभिनाहट) जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।अध्ययन बताते हैं कि तेज़ म्यूजिक सुनने से केवल कान ही नहीं, बल्कि पढ़ने, सोचने और समझने की क्षमता पर भी असर पड़ता है। विशेष रूप से इंट्रोवर्ट स्टूडेंट्स इस प्रभाव से ज्यादा प्रभावित होते हैं, क्योंकि उनका ध्यान आसानी से भटक सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पढ़ाई के दौरान लिरिक्स वाले गाने सुनने से फोकस में कमी आ सकती है, जिससे सीखने की क्षमता प्रभावित होती है। अत्यधिक शोर के कारण कान में स्थित रोम कोशिकाओं की गति बढ़ जाती है, और लंबे समय तक लगातार तेज आवाज़ से ये कोशिकाएँ नष्ट हो सकती हैं।जब कई रोम कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, तो पूरी कोशिका नष्ट हो जाती है, जिससे सुनने की क्षमता कम हो जाती है।हालांकि अच्छी खबर यह है कि सावधानी अपनाकर इन समस्याओं से बचा जा सकता है। म्यूजिक को मध्यम वॉल्यूम में सुनना, समय-समय पर ब्रेक लेना और इंस्ट्रुमेंटल या धीमे गानों का चयन करना कान और दिमाग दोनों की सेहत के लिए फायदेमंद है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नोइज़-कैंसिलिंग हेडफ़ोन का उपयोग, कान की नियमित जांच और पढ़ाई के दौरान फोकस-फ्रेंडली म्यूजिक चुनना सुनने की क्षमता और मानसिक ध्यान बनाए रखने में मदद कर सकता है।कुल मिलाकर, तेज आवाज़ से खतरा तो है, लेकिन सही सावधानियों और आदतों से हम कानों की सुरक्षा और सीखने की क्षमता दोनों को बनाए रख सकते हैं।