ऊना,राकेश-:हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती अब धीरे-धीरे किसानों की पहली पसंद बनती जा रही है। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के बजट में प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में की गई बढ़ोतरी ने किसानों का भरोसा और मजबूत किया है। मुख्यमंत्री के इस फैसले को ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।
सरकार ने प्राकृतिक तरीके से उगाए गए गेहूं का एमएसपी 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया है। इसी तरह मक्का का समर्थन मूल्य 40 से बढ़ाकर 50 रुपये और हल्दी का 90 से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया है। इस फैसले से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद जगी है, जिससे वे प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए और अधिक प्रेरित हो रहे हैं।
जिला ऊना के किसानों में इस निर्णय को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। किसानों का मानना है कि जब सरकार उनकी फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित करती है, तो खेती के प्रति उनका रुझान भी बढ़ता है। ऊना ब्लॉक के मलाहत गांव के प्रगतिशील किसान केवल चंद ने सरकार के इस फैसले को सराहनीय बताते हुए कहा कि यह कदम न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि युवाओं को भी खेती की ओर आकर्षित करेगा।
वहीं, घालूवाल गांव के किसान कुलवंत सिंह, जो पिछले कई वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं, ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने बताया कि वे गेहूं, मक्का, चना, मसूर और प्याज जैसी फसलों का उत्पादन प्राकृतिक पद्धति से कर रहे हैं। उनके अनुसार, इस खेती पद्धति से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और उत्पादन भी बेहतर हुआ है।
कुलवंत सिंह ने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से वे न केवल अपनी आय बढ़ा रहे हैं, बल्कि लोगों को रसायनमुक्त और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य उत्पाद भी उपलब्ध करवा रहे हैं। उनका मानना है कि सरकार द्वारा एमएसपी में की गई यह बढ़ोतरी एक ऐतिहासिक कदम है, जो प्रदेश में रसायनमुक्त खेती को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगा।किसानों का यह भी कहना है कि इस तरह के निर्णय कृषि क्षेत्र को स्थायी और मजबूत दिशा देने में सहायक होंगे। साथ ही, इससे अधिक से अधिक किसान और युवा प्राकृतिक खेती से जुड़ेंगे, जिससे आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा।