Mandi, Dharamveer
आत्मनिर्भरता अब सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की पहचान बन चुका है। भारत सरकार के राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़कर प्रदेश की हजारों महिलाएं आज अपने पैरों पर खड़ी हैं और ‘वोकल फॉर लोकल’ के नारे को साकार कर रही हैं।
मंडी शहर की इंदिरा मार्केट की छत पर लगे “माण्डव हिम ईरा आजीविका मेले” में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं अपने स्थानीय उत्पाद बेचकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। कभी घर से बाहर निकलने में झिझकने वाली ये महिलाएं अब अपने उत्पाद देशभर के मेलों में प्रदर्शित कर रही हैं।बालीचौकी ब्लॉक की रीना देवी बताती हैं कि उनके क्लस्टर में 114 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जो ऊनी कपड़े, शॉल, टोपियाँ, कमरी और चीड़ की पतियों से बने उत्पाद तैयार कर रहे हैं। कई समूह मधुमक्खी पालन और देसी घी उत्पादन से भी जुड़कर अच्छी आमदनी कमा रहे हैं।रीना देवी के अनुसार, पिछले वर्ष शिमला समर फेस्टिवल में प्रदेश की महिलाओं ने लगभग 13 करोड़ रुपये की बिक्री की थी।गोहर ब्लॉक की पवना कुमारी के अनुसार, उनके क्षेत्र के 149 महिला समूह सक्रिय हैं, जिनकी सदस्याएं अपने बनाए उत्पादों की बिक्री से प्रति महिला 15 से 20 हजार रुपये तक की मासिक आय अर्जित कर रही हैं।
करसोग ब्लॉक की तवारको देवी और गोपालपुर ब्लॉक की सीमा कुमारी ने एनआरएलएम के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने का अवसर देने के लिए सरकार का आभार जताया और भविष्य में ऐसे और मेले आयोजित करने की मांग की।निस्संदेह, सरकार की ये पहल न केवल ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान भी दिला रही है।