नई दिल्ली। पिछले दो दशकों में सोना भारतीय निवेशकों के लिए सबसे भरोसेमंद और लाभकारी संपत्ति साबित हुआ है। अक्टूबर 2000 में 24 कैरेट सोने की कीमत 4,400 रुपए प्रति 10 ग्राम थी, वहीं अक्टूबर 2025 में यह 1.32 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुँच गई। महंगाई, आर्थिक अनिश्चितता और वैश्विक संकटों के बीच सोने ने अपनी प्रतिष्ठा “सुरक्षित निवेश” के रूप में बनाए रखी है।
सोने का आकर्षण लगातार बढ़ा
पिछले 25 वर्षों में जब शेयर बाजार और अन्य निवेश साधनों में उतार-चढ़ाव आया, सोने ने निवेशकों के लिए स्थिर विकल्प के रूप में अपनी पकड़ मजबूत की। बढ़ती महंगाई, वैश्विक आर्थिक संकट, मुद्रा अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव ने सोने की मांग और कीमतों को ऊँचा बनाए रखा। केंद्रीय बैंक और बड़े निवेशकों की लगातार खरीदारी ने भी कीमतों को सहारा दिया।
पिछले साल 67% की तेजी
साल 2024-25 में सोने की कीमतों में 67 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई। डॉलर की कमजोरी, वैश्विक व्यापार संघर्ष और त्योहारी सीजन ने भारत में सोने की कीमतों को ऊँचा बनाए रखा।
1 करोड़ में कितना सोना मिलेगा?
अक्टूबर 2025 में 1 करोड़ रुपए निवेश करने पर लगभग 758 ग्राम (0.76 किलोग्राम) सोना खरीदा जा सकता है।
पिछले 25 साल का रिटर्न
अक्टूबर 2000 में 4,400 रुपए प्रति 10 ग्राम और अक्टूबर 2025 में 1.32 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम की कीमत ने सोने को औसतन 14.6% वार्षिक रिटर्न दिलाया। यह पारंपरिक बैंक डिपॉजिट और सेविंग स्कीम से कहीं बेहतर रिटर्न है।
2050 में संभावित कीमतें
अगर यही रिटर्न अगले 25 साल भी बना रहता है, तो 2050 तक 10 ग्राम सोने की कीमत 40 लाख रुपए तक पहुँच सकती है। इसका अर्थ है कि एक करोड़ रुपए में केवल 25 ग्राम सोना खरीदा जा सकेगा, जबकि वर्तमान में यह 758 ग्राम है।
कीमतों में उतार–चढ़ाव संभव
हालांकि यह भविष्यवाणी अनुमान पर आधारित है। सोने की कीमतें ब्याज दर, डॉलर की स्थिति, केंद्रीय बैंक की नीतियों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं। लेकिन इतिहास दिखाता है कि सोना लंबी अवधि में निवेशकों के लिए सुरक्षित और लाभकारी विकल्प बना रहता है।