मुंबई | विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने एक बार फिर भारतीय शेयर बाजार में भरोसा जताते हुए जुलाई के बाद से सबसे अधिक तेजी वाला रुख अपनाया है। यह बदलाव ऐसे समय में देखने को मिला है जब अक्टूबर की शुरुआत में एफपीआई ने बड़ी मात्रा में मंदी वाले सौदे लगाए थे।
पिछले दो हफ्तों में घरेलू इक्विटी बाजार में आई तेजी के चलते विदेशी निवेशकों ने निफ्टी फ्यूचर्स में अपनी शॉर्ट पोजीशन (गिरावट के दांव) काफी हद तक कम कर दी है। इस रुझान के कारण बाजार सितंबर 2024 में बने सर्वकालिक उच्च स्तर के करीब पहुंच गया है।
शॉर्ट कवरिंग से आई तेजी
निफ्टी फ्यूचर्स में एफपीआई की लॉन्ग-शॉर्ट रेशियो (बाजार में तेजी या गिरावट की स्थिति को मापने वाला अनुपात) शुक्रवार को बढ़कर करीब 25% पर पहुंच गई, जो 9 जुलाई के बाद सर्वोच्च स्तर है। आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि विदेशी निवेशक तेजी की पोजीशन मजबूत कर रहे हैं और मंदी की पोजीशन घटा रहे हैं, जिसे शॉर्ट कवरिंग कहा जाता है।
Elios Financial Services के हेड ऑफ इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज शम चंदक ने बताया, “पिछले सप्ताह बाजार में आई मजबूती का मुख्य कारण विदेशी निवेशकों द्वारा की गई शॉर्ट कवरिंग थी।”
लगातार चौथे सप्ताह बढ़त पर बाजार
विदेशी निवेशकों की भावनाओं में बदलाव के साथ बाजार में खरीदारी का सिलसिला भी जारी है। स्टॉक एक्सचेंज और StockEdge के आंकड़ों के अनुसार:
- अक्टूबर 2025 में अब तक FPI ने 1,880 करोड़ रुपये की खरीदारी की है।
- इसके विपरीत, सितंबर 2025 में उन्होंने 22,761 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी।
- हालांकि, चालू वित्त वर्ष में अब तक एफपीआई कुल 1.96 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली कर चुके हैं, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर है। इसका असर रुपये और शेयर बाजार की स्थिरता पर भी दिखाई दिया है।