नई दिल्ली। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने अब महिलाओं को आतंक की राह पर ले जाने की साजिश शुरू कर दी है। संगठन ने अपनी पहली महिला आतंकी ब्रिगेड ‘जमात-उल-मोमिनात’ का गठन किया है। इस खतरनाक अभियान की अगुवाई जैश सरगना मौलाना मसूद अजहर कर रहा है, जो महिलाओं को कट्टरपंथी बनाकर जिहाद के नाम पर आतंकवाद के लिए उकसा रहा है।
ऑडियो रिकॉर्डिंग में खुलासा – महिलाओं के लिए बनाई गई आतंकी ट्रेनिंग प्लान
21 मिनट की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आई है जिसमें मसूद अजहर महिलाओं की भर्ती और प्रशिक्षण का ब्लूप्रिंट बताते हुए सुना जा सकता है। यह रिकॉर्डिंग पाकिस्तान के बहावलपुर स्थित मरकज़ उस्मान-ओ-अली की बताई जा रही है।
रिकॉर्डिंग के अनुसार, पुरुष आतंकियों की तरह महिलाओं के लिए भी आतंकी प्रशिक्षण का अलग ढांचा तैयार किया गया है—
- पहला चरण: दौरा-ए-तस्किया – कट्टरपंथी मानसिकता और ब्रेनवॉशिंग
- दूसरा चरण: दौरा-आयत-उन-निसा – जिहाद के नाम पर धार्मिक भ्रम फैलाना
मसूद अजहर महिलाओं को “जन्नत” का लालच देकर आतंकवाद से जोड़ने की साजिश रच रहा है।
हर जिले में शाखाएं खोलने की योजना, कड़े नियम लागू
जैश ने पाकिस्तान के हर जिले में जमात-उल-मोमिनात की शाखाएँ स्थापित करने की योजना बनाई है। हर शाखा का नेतृत्व एक महिला मुंतज़िमा (ऑर्गेनाइज़र) करेगी, जो भर्ती और प्रशिक्षण की ज़िम्मेदारी संभालेगी।
भर्ती की शर्तें:
- महिलाओं पर कठोर पाबंदियाँ लागू की जाएँगी
- किसी गैर-मेहरम पुरुष से बात करने की मनाही
- पूरा नेटवर्क गुप्त संपर्क प्रणाली पर आधारित
परिवार की महिलाएं भी आतंकी नेटवर्क में शामिल
रिपोर्टों के अनुसार, इस महिला ब्रिगेड का नेतृत्व मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर कर रही है। इसके अलावा—
- दूसरी बहन समायरा अजहर भी सक्रिय
- पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड उमर फारूक की पत्नी अफीरा फारूक भी शामिल
- नेटवर्क में 4–5 ऐसी महिलाएं भी जुड़ी हैं जिनके रिश्तेदार भारतीय सुरक्षा बलों के खिलाफ कार्रवाई में मारे गए
जैश-ए-मोहम्मद की यह नई आतंकी रणनीति महिलाओं के माध्यम से आतंकवाद फैलाने की खतरनाक वैश्विक साजिश को उजागर करती है। सुरक्षा एजेंसियाँ इसे दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मान रही हैं।