Dharamshala, 27 November-:हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में गुरुवार को पंचायत चुनावों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि पंचायत चुनावों में देरी प्राकृतिक आपदा और प्रदेश में लागू आपदा प्रबंधन एक्ट के चलते हो रही है। वहीं, विपक्ष लगातार सरकार पर चुनाव प्रक्रिया को टालने का आरोप लगाता रहा।
‘आपदा प्रबंधन एक्ट लागू, चुनाव करवाना संभव नहीं’ — CM सुक्खू
मुख्यमंत्री सुक्खू ने सदन में कहा कि राज्य इस समय आपदा प्रबंधन एक्ट के तहत काम कर रहा है, इसलिए चुनाव तत्काल करवाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा, “जैसे ही आपदा प्रबंधन एक्ट हटेगा, चुनाव करवा दिए जाएंगे। इस एक्ट के रहते राज्य निर्वाचन आयोग कोई निर्देश जारी नहीं कर सकता।”उन्होंने यह भी बताया कि जून में पंचायतों के पुनर्गठन और वार्डबंदी की प्रक्रिया शुरू हुई थी और इसमें सरकार द्वारा कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया।
2023 से बड़ी थी 2025 की आपदा
सीएम सुक्खू ने कहा कि सरकार ने इतनी बड़ी आपदा की कल्पना नहीं की थी। मणिमहेश यात्रा से लेकर कुल्लू, इंदौरा और फतेहपुर तक कई क्षेत्रों में भारी नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि राजस्व मंत्री नौ दिन भरमौर में राहत कार्यों में जुटे रहे और सीमित संसाधनों के बावजूद सरकार ने तेजी से कार्रवाई की।उन्होंने यह भी कहा कि कुछ नई पंचायतों का गठन बाकी है और नालागढ़ में कई पंचायतों में जनसंख्या नौ हजार से अधिक है, जिनका पुनर्गठन आवश्यक है। उन्होंने जनवरी तक चुनाव करवाने की संभावना जताई। मुख्यमंत्री के जवाब से नाराज़ विपक्ष ने सदन से वाकआउट कर दिया।
आयोग पूरी तरह तैयार— राज्य निर्वाचन आयुक्त
मुख्यमंत्री के बयान के ठीक विपरीत, राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने बुधवार को कहा था कि आयोग पंचायत चुनाव करवाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार और प्रशासन सहयोग करें तो 31 जनवरी से पहले मतदान संभव है।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आचार संहिता की धारा 12.1 को हटाया नहीं जाएगा।पंचायत चुनावों को लेकर सरकार और आयोग के बयान अलग-अलग दिशा में इशारा कर रहे हैं, जिससे राजनीतिक गर्मी और बढ़ गई है।