Chamba, Manjur Pathan-:हिमाचल प्रदेश का ऐतिहासिक नगर चंबा, जो अपनी हजार वर्ष पुरानी सांस्कृतिक और वास्तुकला की विरासत के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है, आज गंभीर भूस्खलन संकट से जूझ रहा है। नगर के किनारे बसे कई वार्डों में लगातार हो रहे भूमि धंसाव ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर कश्मीरी मोहल्ला और चौगान क्षेत्र पिछले कई वर्षों से सक्रिय भूस्खलन की चपेट में हैं, जहां दर्जनों मकान कभी भी खतरे में पड़ सकते हैं।
बरसात का मौसम शुरू होते ही हालात और भयावह हो जाते हैं। हर साल एहतियात के तौर पर प्रशासन प्रभावित परिवारों को अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर देता है, लेकिन बारिश खत्म होते ही लोग फिर उसी असुरक्षित इलाके में लौटने को मजबूर हो जाते हैं। वजह साफ है—न तो स्थायी सुरक्षा दीवार का निर्माण पूरा हुआ और न ही भूमि स्थिरीकरण के लिए कोई ठोस योजना धरातल पर उतर पाई।स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर परिषद द्वारा कुछ समय पहले सुरक्षा दीवार बनाने का काम शुरू किया गया था, लेकिन यह कार्य बीच में ही रोक दिया गया। अधूरे निर्माण के कारण खतरा और बढ़ गया है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।
भूस्खलन का खतरा केवल रिहायशी मकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि चंबा की ऐतिहासिक धरोहरें भी इसकी जद में हैं। प्रभावित क्षेत्र में राजा शाम सिंह अस्पताल, भूरी सिंह संग्रहालय, स्नो व्यू प्वाइंट, ऐतिहासिक जामा मस्जिद, गांधी गेट, हरि राय मंदिर, बाबा श्रीचंद मंदिर और वर्ष 1904 में बना फायर ब्रिगेड कार्यालय स्थित हैं। यदि भूस्खलन और तेज हुआ, तो इन बेशकीमती धरोहरों को भारी नुकसान पहुंच सकता है।स्थानीय निवासियों ने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि अस्थायी उपायों के बजाय स्थायी सुरक्षा योजना बनाई जाए। उनका कहना है कि वर्षों से वे डर के साए में जी रहे हैं और अब इस समस्या का ठोस समाधान जरूरी हो गया है, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले चंबा और उसकी विरासत को बचाया जा सके।