चंडीगढ़ I जननायक जनता पार्टी (JJP) यूथ विंग के अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला ने अपनी सुरक्षा वापस लेने के हरियाणा सरकार के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दिग्विजय चौटाला, जो पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के पौत्र और पूर्व उपप्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल के परपोत्र हैं, की सुरक्षा पिछले सप्ताह राज्य सरकार द्वारा वापस ले ली गई थी।
हाईकोर्ट ने दिया सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश
हाईकोर्ट ने दिग्विजय चौटाला की याचिका पर सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए कि दिग्विजय और उनके परिवार की जान और संपत्ति की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जाए। यह आदेश न्यायाधीश संजय वशिष्ठ ने पारित किया।
धमकियों के आधार पर हुई थी FIR
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उन्हें बिश्नोई गैंग की ओर से गंभीर धमकियां मिली थीं। इन धमकियों के आधार पर 30 जुलाई 2025 को डबवाली थाने में FIR दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद, राज्य के वर्तमान DGP ने 10 दिसंबर 2025 को बिना किसी ठोस कारण या लिखित स्पष्टीकरण के उनकी सुरक्षा वापस ले ली। दिग्विजय के वकीलों ने इसे मनमाना और संभावित खतरे को नजरअंदाज करने वाला कदम बताया।
DGP पर परिवार विरोधी रवैये का आरोप
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को यह भी बताया कि DGP का चौटाला परिवार के प्रति कथित विरोधात्मक रवैया उनके एक आंतरिक संचार (11 दिसंबर को मीडिया में प्रकाशित) से भी स्पष्ट है। ऐसे माहौल में सुरक्षा हटाना दिग्विजय और उनके परिवार की जान के लिए गंभीर खतरा हो सकता है।
अदालत ने गंभीरता से लिया मामला
सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने दिग्विजय की याचिका को निस्तारित करते हुए हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता की चिंताओं को गंभीरता से ले और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तुरंत आवश्यक कदम उठाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य की जिम्मेदारी है कि किसी भी नागरिक को वास्तविक खतरे की स्थिति में उचित सुरक्षा उपलब्ध कराए।
अन्य JJP नेताओं की सुरक्षा भी वापस ली गई थी
याद रहे कि जिस दिन दिग्विजय की सुरक्षा वापस हुई थी, उस दिन चार अन्य JJP नेताओं की भी सुरक्षा वापस ली गई थी। इनमें शामिल थे:
- पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के ससुर, पूर्व ADGP परमजीत सिंह अहलावत
- गुरुग्राम से लोकसभा चुनाव लड़ चुके गायक राहुल फाजिलपुरिया
- सोहना से चुनाव लड़ चुके विनेश गुर्जर
- JJP नेता देवेंद्र कादियान
पुलिस महानिदेशक ने अगले दिन स्पष्ट किया कि पूरे राज्य में लगभग 200 लोगों की सुरक्षा वापस ली गई, जिन्हें प्रशासन ने जरूरी नहीं माना।