नई दिल्ली | भारत में कामकाजी लोगों के लिए खुशखबरी है। साल 2026 में कंपनियां कर्मचारियों की सैलरी में औसतन 9 फीसदी तक बढ़ोतरी कर सकती हैं। यह स्तर 2025 के लगभग समान रहने की संभावना है। यह जानकारी मर्सर के टोटल रिम्यूनरेशन सर्वे से सामने आई है, जिसमें देश की 1,500 से ज्यादा कंपनियों को शामिल किया गया।
कौन से सेक्टर में सबसे ज्यादा सैलरी बढ़ोतरी संभव है?
सर्वे के अनुसार मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर में सबसे अधिक वेतन वृद्धि देखने को मिल सकती है। इन सेक्टर्स में औसतन 9.5 फीसदी तक इंक्रीमेंट का अनुमान है। इसके अलावा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) में भी लगभग 9 फीसदी की सैलरी बढ़ोतरी संभव है।
क्यों स्थिर है सैलरी बढ़ोतरी का ट्रेंड?
मर्सर इंडिया की रिवार्ड्स कंसल्टिंग लीडर मालती के.एस. के अनुसार, भारत में सैलरी बढ़ोतरी का यह स्तर आर्थिक स्थिरता और संतुलन को दर्शाता है। कंपनियां खर्च पर सतर्क हैं, टैलेंट मार्केट में ठहराव है और नौकरी छोड़ने की दर (एट्रिशन) नियंत्रण में है।
रिवार्ड और इंसेंटिव पर बढ़ा जोर
सर्वे में यह भी सामने आया है कि कंपनियां अब लॉन्ग-टर्म बेनिफिट्स के बजाय शॉर्ट-टर्म इंसेंटिव और परफॉर्मेंस-बेस्ड रिवॉर्ड्स पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। इसका उद्देश्य बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को प्रेरित करना और उन्हें लंबे समय तक कंपनी से जोड़कर रखना है।
भर्ती और नौकरी छोड़ने की दर
2026 के लिए हायरिंग के मामले में कंपनियां सतर्क हैं। जहां 2024 में 43% कंपनियां नई भर्ती की योजना बना रही थीं, 2026 में यह आंकड़ा घटकर 32% रहने का अनुमान है। इसके अलावा लगभग 31% कंपनियां अभी अपनी भर्ती रणनीति को अंतिम रूप नहीं दे पाई हैं।
एक सकारात्मक संकेत यह है कि कर्मचारियों के बीच नौकरी छोड़ने की दर लगातार घट रही है:
- स्वैच्छिक एट्रिशन 2023 में 13.1% थी, जो 2025 की पहली छमाही में घटकर 6.4% रह गई।
- जबरन छंटनी की दर भी घटकर 1.6% हो गई।
कुल मिलाकर, 2026 में सैलरी बढ़ोतरी भले ही बहुत अधिक न हो, लेकिन यह स्थिर और संतुलित रहने की उम्मीद है। कंपनियां खर्च पर नियंत्रण रखते हुए अच्छे टैलेंट को बनाए रखने पर ध्यान दे रही हैं, जिससे कर्मचारियों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद कामकाजी माहौल बनेगा।