चंडीगढ़ | मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को समाधान शिविरों की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस दौरान सभी जिला उपायुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि समाधान शिविरों में प्राप्त हर शिकायत को स्पष्ट टिप्पणी के साथ संबंधित विभागों को भेजा जाए और जब तक उसका पूर्ण समाधान नहीं हो जाता, तब तक उसे जिला स्तर पर ही लंबित रखा जाए।
सीएम ने कहा कि समाधान शिविरों का उद्देश्य केवल शिकायत दर्ज करना नहीं, बल्कि आमजन को त्वरित राहत दिलाना है। इसके लिए जरूरी है कि शिविरों की जानकारी व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचे। उन्होंने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि शिविरों के आयोजन की तिथि और समय का प्रचार विभिन्न माध्यमों से किया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग अपनी समस्याओं के समाधान के लिए शिविरों तक पहुंच सकें।
बैठक में बताया गया कि जुलाई से दिसंबर के बीच प्रदेशभर में कुल 17,699 शिकायतों का समाधान किया जा चुका है। वर्तमान में सभी जिला उपायुक्त और उप-मंडल अधिकारी (नागरिक) कार्यालयों में प्रत्येक सप्ताह सोमवार और वीरवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक समाधान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जहां नागरिक सीधे अपनी शिकायतें दर्ज करवा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि शिविरों में आने वाले नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए और हर शिकायत को गंभीरता से सुना जाए। यदि किसी भी स्तर पर अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने अंबाला जिले के एक गांव में पानी की निकासी से जुड़ी शिकायत का संज्ञान लेते हुए संबंधित जिला उपायुक्त को तुरंत समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने इस समस्या के निपटारे के लिए एक समिति गठित करने को कहा, जिसमें संबंधित विभाग के एक्सईएन, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (बीडीपीओ) और मार्केट कमेटी के एक कर्मचारी को शामिल किया जाएगा, ताकि समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।