Dharamshala, Rahul-:पिछले करीब तीन महीनों से जारी ड्राई स्पेल ने जिला कांगड़ा और चंबा में पेयजल व्यवस्था को धीरे-धीरे संकट की ओर धकेलना शुरू कर दिया है। लगातार बारिश और बर्फबारी न होने के कारण दोनों जिलों की लगभग 25 से 30 फीसदी पेयजल योजनाएं प्रभावित हो चुकी हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जल शक्ति विभाग ने ड्राई स्पेल से निपटने के लिए कंटीजेंसी प्लान तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
जल शक्ति विभाग को इस संबंध में ईएनसी कार्यालय से स्पष्ट दिशानिर्देश प्राप्त हुए हैं। इन निर्देशों के तहत अब जिला कांगड़ा और चंबा की सभी पेयजल योजनाओं की हर शनिवार को समीक्षा की जाएगी। प्रभावित योजनाओं की पहचान कर उन्हें सुचारू बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर काम किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार जिला कांगड़ा और चंबा में कुल 1550 पेयजल योजनाएं संचालित हैं। इनमें से 750 योजनाएं कांगड़ा जबकि 800 योजनाएं चंबा जिले में हैं। मौजूदा ड्राई स्पेल का सबसे ज्यादा असर उन योजनाओं पर पड़ा है, जो झरनों और छोटे नालों पर आधारित हैं। दिसंबर और जनवरी माह में सर्दियों की बारिश न होने के कारण इन जल स्रोतों में पानी की मात्रा लगातार घटती जा रही है।जल शक्ति विभाग द्वारा प्रभावित योजनाओं के लिए विशेष कंटीजेंसी प्लान तैयार किया जा रहा है। इसके तहत जहां आवश्यक होगा, वहां मौजूदा बोरवेल से योजनाओं को जोड़ा जाएगा या फिर नए बोरवेल स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा वैकल्पिक जल स्रोतों की भी पहचान की जा रही है ताकि पेयजल आपूर्ति बाधित न हो।
विभागीय स्तर पर इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक्सईएन डिजाइन जोनल कार्यालय को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। प्रत्येक शनिवार को होने वाली समीक्षा बैठक में यह आकलन किया जाएगा कि किन क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा गंभीर है और वहां तत्काल क्या कदम उठाए जा सकते हैं। फिलहाल ब्यास और न्यूगल नदी पर आधारित पेयजल योजनाओं पर ड्राई स्पेल का खास असर नहीं पड़ा है और इन क्षेत्रों में पानी की सप्लाई सामान्य रूप से जारी है। हालांकि कुछ इलाकों में एहतियातन 5 से 10 मिनट तक पेयजल वितरण अवधि में कटौती की जा सकती है।
आने वाले दिनों में बढ़ सकती है परेशानी
जल शक्ति विभाग धर्मशाला जोन के चीफ इंजीनियर दीपक गर्ग ने बताया कि यदि ड्राई स्पेल आगामी 15 से 20 दिनों तक और जारी रहता है, तो पेयजल वितरण अवधि में और कटौती करनी पड़ सकती है। अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों में एक दिन छोड़कर पानी देने जैसी व्यवस्था भी लागू की जा सकती है। उन्होंने कहा कि विभाग हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है और प्राथमिकता लोगों को पेयजल उपलब्ध करवाने की है।
फसलों पर भी दिख रहा असर
ड्राई स्पेल का असर सिर्फ पेयजल योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती-किसानी पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। चीफ इंजीनियर के अनुसार कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां सिंचाई की कोई स्थायी सुविधा नहीं है और किसान पूरी तरह बारिश पर निर्भर हैं। बारिश न होने से फसलें प्रभावित हो रही हैं। विभाग द्वारा सिंचाई के लिए भी अलग-अलग क्षेत्रों में बारी-बारी से पानी उपलब्ध करवाने का कंटीजेंसी प्लान तैयार किया जा रहा है।
बर्फबारी न हुई तो हालात होंगे गंभीर
दीपक गर्ग ने बताया कि धर्मशाला, पालमपुर, चंबा और डलहौजी क्षेत्र की अधिकांश नदियां बर्फबारी पर निर्भर हैं। सर्दियों में होने वाली बर्फबारी ही इन नदियों को गर्मियों और बरसात तक रिचार्ज रखती है। इस सर्दी में अब तक सिर्फ एक बार ही बर्फबारी हुई है। यदि जनवरी और फरवरी में पर्याप्त बर्फबारी नहीं होती है, तो मार्च, अप्रैल और मई में पेयजल संकट विकराल रूप ले सकता है.
टैंकर से सप्लाई से बचने की कोशिश
विभाग का प्रयास है कि गर्मियों में टैंकर के जरिए पानी सप्लाई करने की नौबत न आए। हालांकि कुछ क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है, जहां जरूरत पड़ने पर टैंकर से पानी पहुंचाया जा सकता है। मौसम विभाग द्वारा आगामी दिनों में बारिश की संभावना जताए जाने से विभाग को राहत की उम्मीद है।