जींद। हाइड्रोजन ट्रेन के प्रस्तावित ट्रायल से पहले तकनीकी तैयारियों को परखने के लिए शुक्रवार को रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम जींद पहुंची। दिल्ली से आए रेलवे के प्रिंसिपल चीफ मैकेनिकल इंजीनियर (पीसीएमई) डिंपी गर्ग के नेतृत्व में अधिकारियों ने हाइड्रोजन प्लांट का गहन निरीक्षण किया और वहां मौजूद तकनीकी खामियों की विस्तार से समीक्षा की। अधिकारी करीब ढाई घंटे तक प्लांट परिसर में रहे और कर्मचारियों से विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान पीसीएमई डिंपी गर्ग ने आरओ सिस्टम की कार्यप्रणाली को विशेष रूप से जांचा। उन्होंने कर्मचारियों से शुद्धिकरण प्रक्रिया, पानी की गुणवत्ता और सिस्टम की नियमित मॉनिटरिंग को लेकर सवाल पूछे। अधिकारियों को बताया गया कि आरओ सिस्टम से निकलने वाले शुद्ध पानी और वेस्ट पानी के लिए अलग-अलग टैंक बनाए गए हैं, ताकि दोनों को अलग-अलग तरीके से उपयोग और नियंत्रित किया जा सके।
पीसीएमई ने निर्देश दिए कि शुद्ध पानी के टैंक को हरे रंग से पेंट किया जाए, जिससे उसकी स्पष्ट पहचान बनी रहे और किसी भी तरह की तकनीकी भ्रम की स्थिति न हो। इसके साथ ही उन्होंने आरओ पानी के टीडीएस (टोटल डिजॉल्व्ड सॉलिड्स) की प्रतिदिन निगरानी के लिए चार्ट तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि टीडीएस की रोजाना जांच से पानी की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखी जा सकेगी, जो हाइड्रोजन उत्पादन और ट्रेन संचालन के लिए बेहद जरूरी है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्लांट में पानी के टीडीएस की जांच के लिए दो से तीन मीटर अनिवार्य रूप से उपलब्ध होने चाहिए, ताकि किसी भी स्तर पर तकनीकी कमी न रहे। रेलवे अधिकारियों ने कर्मचारियों को समय-समय पर रिपोर्ट अपडेट करने और मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए।
इस मौके पर सीनियर डीसीएम नवीन कुमार झा ने बताया कि कालका-शिमला सेक्शन पर हाइड्रोजन ट्रेन चलाने को लेकर पहले ही सर्वे किया जा चुका है। फिलहाल यह परियोजना किस चरण में है, इसकी समीक्षा की जा रही है और जल्द ही आगे की स्थिति स्पष्ट की जाएगी। रेलवे का लक्ष्य है कि सभी तकनीकी मानकों को पूरा करने के बाद ही हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल शुरू किया जाए।