अमृतसर । पंजाब में रोजगार के अवसर सीमित होने के चलते युवाओं में विदेश जाने की होड़ लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में राज्य सरकार के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के दावे ज़मीनी हकीकत से दूर नजर आ रहे हैं। हालात यह हैं कि पंजाब का बड़ा हिस्सा अब देश में भविष्य तलाशने के बजाय विदेश जाकर कमाई करने के सपने देख रहा है। अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया पारंपरिक पसंद बने हुए हैं, जबकि अब युवा यूरोपीय देशों में जाने के लिए भी खतरनाक और गैर-कानूनी रास्ते अपनाने से नहीं हिचकिचा रहे।
इस बढ़ती प्रवृत्ति का सबसे ज्यादा फायदा फर्जी ट्रैवल एजेंट उठा रहे हैं। पूरे पंजाब में नकली इमिग्रेशन एजेंटों का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जो युवाओं की मजबूरी और बेरोजगारी का फायदा उठाकर उन्हें ठग रहा है। ये एजेंट विदेश भेजने के नाम पर मोटी रकम वसूलते हैं और बाद में पीड़ितों को पुलिस थानों व अदालतों के चक्कर काटने के लिए मजबूर कर देते हैं। इस इमिग्रेशन फ्रॉड ने राज्य की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।
बताया जाता है कि कई परिवार अपने बच्चों को विदेश में सेटल करने की चाह में जीवन भर की जमा-पूंजी गंवा चुके हैं। माता-पिता की मजबूरी को भांपकर फर्जी एजेंट भावनात्मक दबाव बनाते हैं और बड़े-बड़े सपने दिखाकर लाखों रुपये ऐंठ लेते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, नकली एजेंट आमतौर पर 1.5 से 2 लाख रुपये तक की ठगी करते हैं, जबकि कई मामलों में यह रकम कहीं ज्यादा होती है।
गैर-कानूनी तरीकों से विदेश जाने वाले युवाओं की स्थिति और भी चिंताजनक है। ‘डंकी रूट’ के जरिए विदेश पहुंचे कई युवक या तो वहां अंडरग्राउंड रहने को मजबूर हैं या फिर विदेशी पुलिस की गिरफ्त में आकर जेलों और डिटेंशन कैंपों में पहुंच चुके हैं। कुछ मामलों में युवाओं की जान तक चली गई है। गांवों में हालात ऐसे हैं कि विदेश जाने के जुनून में युवा अपनी जमीनें तक बेच रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, फर्जी ट्रैवल एजेंटों के शिकार करीब 70 प्रतिशत अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे बेरोजगार युवा होते हैं। हालांकि अब पढ़े-लिखे युवक भी सिस्टम से निराश होकर इनके जाल में फंसते जा रहे हैं। यह पूरा नेटवर्क चेन सिस्टम पर काम करता है, जिसमें एजेंट होटल, कॉलेज और प्रशिक्षण केंद्रों के आसपास सक्रिय रहते हैं और फोन कॉल के जरिए वीजा दिलाने का लालच देते हैं।
वहीं, आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार के उस चुनावी दावे पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिसमें कहा गया था कि राज्य में इतने रोजगार पैदा होंगे कि युवाओं को बाहर नहीं जाना पड़ेगा। हकीकत यह है कि आज भी कई सरकारी विभागों में सैकड़ों पद खाली पड़े हैं, लेकिन उन्हें भरने की प्रक्रिया धीमी है। रोजगार की कमी और फर्जी एजेंटों का बढ़ता जाल सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।