अमृतसर | एक ओर जहां अमृतसर को पवित्र गुरु नगरी का दर्जा प्राप्त है और देश-विदेश से श्रद्धालु यहां आध्यात्मिक शांति के लिए पहुंचते हैं, वहीं दूसरी ओर यह शहर तेजी से बढ़ते वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। शहर की आबोहवा में घुलता जहर अब आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। बिगड़ता पर्यावरण न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि यहां आने वाले पर्यटकों के लिए भी चिंता का विषय बन चुका है।
विशेषज्ञों और शहर के बुद्धिजीवियों का मानना है कि प्रदूषण बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण नियमों को ताक पर रखकर चल रही फैक्ट्रियां और सरकारी मानकों के अनुसार कंडम घोषित किए जा चुके पुराने वाहन हैं। शहर के आसपास स्थित औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला काला धुआं सीधे वातावरण में मिल रहा है, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है।
इसके साथ ही सड़कों पर वाहनों की बेतहाशा बढ़ती संख्या ने हालात और भी बिगाड़ दिए हैं। हॉल गेट, पुतलीघर, मजीठा रोड, बटाला रोड, रणजीत एवेन्यू और लॉरेंस रोड जैसे प्रमुख इलाकों में दिनभर ट्रैफिक जाम और धुएं का आलम बना रहता है, जिससे आम नागरिकों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।
प्रशासनिक लापरवाही पर उठ रहे सवाल
शहरवासियों का आरोप है कि यह स्थिति प्रशासन की ढिलाई का नतीजा है। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड द्वारा नियमों का उल्लंघन करने वाली फैक्ट्रियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही। सड़कों की खराब हालत, वैकल्पिक मार्गों की कमी और ट्रैफिक प्रबंधन की कमजोर व्यवस्था के कारण समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। हालांकि कभी-कभार जांच अभियान जरूर चलाए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका खास असर नजर नहीं आता।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना, बड़े स्तर पर पौधारोपण करना और पुराने वाहनों के इस्तेमाल पर सख्ती जरूरी है।
प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की सफाई
प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी एक्सियन सुखदेव सिंह ने बताया कि औद्योगिक इकाइयों की नियमित जांच की जा रही है और नियम तोड़ने वाली कई फैक्ट्रियों को नोटिस जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि लोग निजी वाहनों की बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। उनके अनुसार वर्ष 2025-26 में वायु गुणवत्ता 2024 की तुलना में बेहतर रही है, हालांकि अभी इसे पूरी तरह स्वच्छ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने यह भी बताया कि सड़कों और गलियों में कूड़ा जलाने की घटनाएं प्रदूषण को और बढ़ा रही हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
डिस्ट्रिक्ट एपिडिम्योलॉजिस्ट ऑफिसर डॉ. हरजोत कौर ने कहा कि बढ़ता वायु प्रदूषण बच्चों और बुजुर्गों के फेफड़ों पर सीधा असर डाल रहा है। अस्पतालों में श्वसन संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि प्रदूषित इलाकों में जाते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें।
डॉ. हरजोत कौर ने कहा कि प्रदूषित हवा विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए बेहद खतरनाक है। भीड़भाड़ वाले चौराहों और यातायात वाले इलाकों में मास्क का उपयोग कर जहरीले कणों से बचाव किया जा सकता है। उन्होंने सभी नागरिकों से प्रदूषण रोकने में जिम्मेदारी निभाने की अपील की।