Una, Rakesh-:हिमाचल प्रदेश में हिमाचल प्रदेश हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी हिमुडा द्वारा ऊना जिले के हरोली विधानसभा क्षेत्र में प्रस्तावित आवासीय कॉलोनी के लिए खरीदी गई जमीन को लेकर सियासी तूफान खड़ा हो गया है। विजिलेंस विभाग द्वारा इस मामले में घोटाले की आशंका के चलते एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। इस एफआईआर में एक किसान को आरोपी बनाए जाने के बाद कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी आमने-सामने आ गई हैं।
इस पूरे मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता और हरोली विधानसभा से तीन बार चुनाव लड़ चुके प्रोफेसर रामकुमार शर्मा ने ऊना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए। मीडिया से बातचीत में रामकुमार शर्मा ने कहा कि हिमुडा द्वारा आवासीय कॉलोनी के लिए जमीन खरीदने की प्रक्रिया वर्ष 2013-14 में शुरू हुई थी, उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और मौजूदा उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री उस सरकार में मंत्री थे।रामकुमार शर्मा ने कहा कि जमीन को फाइनल करने में तीन से चार साल का लंबा समय लिया गया। इस दौरान दो अलग-अलग जमीन के टुकड़ों को चिन्हित किया गया, जिनमें एक का रेट 5 लाख रुपये प्रति कनाल और दूसरी जमीन का रेट 4 लाख रुपये प्रति कनाल तय किया गया। कुल करीब 600 कनाल जमीन को फाइनल किया गया और किसानों से औसतन 4 लाख 11 हजार रुपये प्रति कनाल की दर से जमीन खरीदने की डील तय की गई।
भाजपा प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार के कार्यकाल में न तो जमीन खरीदी गई और न ही जमीन के रेट फाइनल किए गए। उन्होंने कहा कि जमीन के दाम तय करने और सौदे को अंतिम रूप देने का पूरा काम कांग्रेस सरकार के समय में हुआ था। भाजपा सरकार के दौरान केवल पेमेंट की प्रक्रिया शुरू हुई, जो मौजूदा सुक्खू सरकार के कार्यकाल में भी जारी है।
रामकुमार शर्मा ने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस सरकार के समय जमीन फाइनल की गई और उसके रेट तय हुए, तब किसी भी कांग्रेस नेता ने इस पर आपत्ति क्यों नहीं जताई। खास तौर पर उन्होंने मुकेश अग्निहोत्री का नाम लेते हुए कहा कि आज विजिलेंस द्वारा एफआईआर दर्ज होने के बाद बयानबाजी की जा रही है, लेकिन उस समय न तो नेता प्रतिपक्ष रहते हुए और न ही सरकार में रहते हुए कोई आपत्ति दर्ज करवाई गई।उन्होंने आरोप लगाया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद कांग्रेस के नेता अब अपनी “स्किन सेफ” करने के लिए बयान दे रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता ने यह भी पूछा कि जमीन के दाम तय करने में चार साल का समय क्यों लगाया गया और इस प्रक्रिया में किस भूमिका में कौन-कौन शामिल था, इसकी जांच होनी चाहिए।
भाजपा प्रवक्ता ने जयराम ठाकुर सरकार के कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उसी हरोली विधानसभा क्षेत्र में बल्क ड्रग पार्क के लिए करीब 1400 एकड़ जमीन किसानों से खरीदी गई थी। उन्होंने कहा कि उस समय किसानों से एक लाख रुपये प्रति कनाल की दर से जमीन खरीदी गई और पूरी प्रक्रिया महज दस दिनों में पूरी कर ली गई थी। उन्होंने दावा किया कि उस दौरान किसी भी दलाल को बीच में नहीं डाला गया और किसानों को सीधा भुगतान किया गया।रामकुमार शर्मा ने कहा कि ड्रग पार्क के लिए जमीन पारदर्शी तरीके से खरीदी गई और आज वही ड्रग पार्क हरोली में आकार ले रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमुडा की जमीन खरीद के मामले में कांग्रेस सरकार के समय दलालों की भूमिका रही, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।उन्होंने कांग्रेस नेताओं से सवाल करते हुए कहा कि जब भाजपा सरकार के समय जमीन की पेमेंट की जा रही थी और कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में थे, तब उन्होंने अपनी आवाज क्यों नहीं उठाई। अगर उस समय कोई गड़बड़ी नजर आ रही थी तो इसकी शिकायत क्यों नहीं की गई।
अंत में भाजपा प्रवक्ता रामकुमार शर्मा ने प्रदेश सरकार से इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि विजिलेंस जांच से सच्चाई सामने आनी चाहिए ताकि जनता को पता चल सके कि हिमुडा की जमीन खरीद में वास्तव में जिम्मेदार कौन है।