करनाल | हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने करनाल स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) में सातवीं कक्षा के छात्र के साथ कथित शारीरिक दंड के मामले का गंभीर संज्ञान लिया है। आयोग ने इसे बच्चों के मौलिक अधिकारों और किशोर न्याय अधिनियम का उल्लंघन बताया और तुरंत जांच के आदेश जारी किए हैं।
शिकायत के अनुसार, छात्र से एक मामूली गलती के कारण शिक्षक ने अन्य विद्यार्थियों की मौजूदगी में बार-बार थप्पड़ मारे। इस घटना से बच्चे को मानसिक आघात, भय, अपमान और असुरक्षा की भावना उत्पन्न हुई।
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और गरिमा पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरोपित शिक्षक का व्यवहार किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 75 और 82 तथा बालकों के निश्शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 17 का गंभीर उल्लंघन है।
जांच में स्कूल में लागू बाल सुरक्षा उपायों, पिछले अभिलेखों और शिकायतों की समीक्षा, बच्चों के मानसिक कल्याण के लिए उठाए गए कदम और किशोर न्याय अधिनियम के तहत पंजीकृत मामलों की स्थिति का मूल्यांकन शामिल होगा। आयोग इस मामले में पूरी गंभीरता के साथ कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
DPS करनाल की प्रिंसिपल सुमन मदान ने कहा कि हमारे स्कूल में बच्चों की सुरक्षा और सम्मान का पूरा ध्यान रखा जाता है। शिकायतकर्ता का बच्चा अब भी स्कूल में पढ़ रहा है और नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।