नारनौंद (हिसार)। हरियाणा के ऐतिहासिक राखीगढ़ी में चल रही खुदाई के दौरान एक बार फिर हड़प्पाकालीन सभ्यता से जुड़े महत्वपूर्ण अवशेष सामने आए हैं। पुरातत्व विभाग की टीम को टीला नंबर-2 पर मिट्टी से बनी डाइनिंग टेबल (खाने की मेज), चूल्हा और मृदभांडों (बर्तनों) के टूटे हुए टुकड़े मिले हैं। इन अवशेषों को देखकर विशेषज्ञों का मानना है कि हजारों वर्ष पहले भी यहां के लोग व्यवस्थित और उन्नत जीवनशैली जीते थे।
खुदाई से प्राप्त सामग्री यह संकेत देती है कि उस दौर में लोग भोजन पकाने और खाने के लिए निश्चित स्थान और सुविधाजनक व्यवस्था रखते थे। मिट्टी की बनी डाइनिंग टेबल और चूल्हा इस बात का प्रमाण हैं कि हड़प्पा सभ्यता के लोग आधुनिक जीवन की तरह ही सुविधाओं से युक्त घरों में रहते थे।
पुरातत्वविदों के अनुसार खुदाई में मिले बर्तनों के टुकड़ों और अन्य अवशेषों को साफ कर कार्बन डेटिंग के लिए भेजा जाएगा, जिससे उनकी वास्तविक उम्र और कालखंड की पुष्टि हो सके।
खास बात यह है कि टीला नंबर-2 के बाहरी किनारों पर भी अवशेष मिलने लगे हैं। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि राखीगढ़ी की बसावट केवल मुख्य हिस्से तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके बाहरी क्षेत्रों में भी लोग निवास करते थे। कच्ची ईंटों की दीवारें और चूल्हे के अवशेष इसी ओर इशारा कर रहे हैं।
वहीं, टीला नंबर-1 पर करीब एक फीट तक खुदाई हो चुकी है, जहां अभी तक ठोस संरचना नहीं मिली है, लेकिन मिट्टी के टुकड़े लगातार निकल रहे हैं। इसके साथ ही टीला नंबर-3 पर भी खुदाई जारी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तीनों टीलों पर हो रही यह खुदाई आने वाले समय में राखीगढ़ी की प्राचीन ‘मेगा सिटी’ संरचना और हड़प्पा सभ्यता के रहस्यों को समझने में अहम भूमिका निभाएगी।