पंचकूला। पंचकूला एक्सटेंशन में नए सेक्टरों की घोषणा के बाद जमीनों के दाम तेजी से बढ़े तो इसका फायदा उठाने के लिए लैंड माफिया ने बड़ा खेल शुरू कर दिया। जांच में सामने आया है कि पर्ल ग्रुप (पीजीएफ/पीएसीएल) से जुड़ी प्रतिबंधित जमीनों पर सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट स्टे के बावजूद फर्जी तरीके से रजिस्ट्रियां और इंतकाल कराए गए। इस पूरे मामले ने प्रशासनिक तंत्र की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार रायपुररानी तहसील क्षेत्र में जमीन रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए और नियमों को दरकिनार कर जमीन की खरीद-फरोख्त की गई। कई मामलों में जमीन आगे बेच दी गई ताकि असली साजिश दबाई जा सके। अब पुलिस और विजिलेंस टीम उन लोगों की पहचान में जुटी है जिन्होंने विवादित जमीन खरीदी।
कुछ खरीदारों ने दावा किया है कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट के स्टे की जानकारी नहीं थी और उन्होंने नियमों के अनुसार रजिस्ट्री करवाई थी। हालांकि, विजिलेंस हर पहलू की जांच कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है। संदिग्ध भूमिका पाए जाने पर आगे और गिरफ्तारियां तय मानी जा रही हैं।
एसडीएम ने डीसी को भेजा पत्र, कार्रवाई फिर भी नहीं
मामला उजागर होने के बाद पंचकूला के एसडीएम चंद्रकांत कटारिया ने 31 जनवरी को डीसी को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की सिफारिश की थी। पत्र में रायपुररानी तहसीलदार, पटवारी, रीडर क्लर्क और कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका पर संदेह जताते हुए रिकॉर्ड में हेरफेर की आशंका बताई गई थी। बावजूद इसके, एक सप्ताह बीतने के बाद भी जिला स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
16 अक्टूबर से शुरू हुआ फर्जीवाड़ा, तहसीलदार गिरफ्तार
जांच में पता चला कि 16 अक्टूबर 2025 को बलदेव कौर ने पर्ल ग्रुप से जुड़ी करीब 18 एकड़ जमीन नवीन नामक व्यक्ति को बेच दी। इसके बाद नवीन ने इस जमीन को चार हिस्सों में बांटकर अलग-अलग लोगों को बेच दिया।
मामला विजिलेंस तक पहुंचा तो 30 जनवरी को केस दर्ज हुआ और 31 जनवरी को रायपुररानी के तहसीलदार विक्रम सिंगला को गिरफ्तार कर लिया गया। पांच दिन की रिमांड के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। विजिलेंस अब बलदेव कौर, डीआरओ जोगिंदर शर्मा और नवीन की तलाश कर रही है। चार नई फर्जी रजिस्ट्रियां सामने आने के बाद जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी
बताया जा रहा है कि पर्ल ग्रुप की कंपनियों ने निवेशकों से धोखाधड़ी कर रायपुररानी और शाहपुर गांव में करीब 172 एकड़ जमीन खरीदी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इन संपत्तियों की बिक्री पर रोक लगाते हुए रिटायर्ड जज विक्रमजीत सैन की अध्यक्षता में समिति गठित की थी, ताकि जमीन बेचकर निवेशकों को धन वापस किया जा सके।
आरोप है कि तहसीलदार, तहसील स्टाफ और राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों ने निजी लोगों के साथ मिलकर प्रतिबंधित जमीन पर स्टे हटवाने, फर्जी विरासत इंतकाल कराने और जमीन कौड़ियों के भाव बिकवाने में भूमिका निभाई। विजिलेंस की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।