हिसार। हरियाणा में फरवरी के पहले पखवाड़े में मौसम ने इस बार सामान्य से अलग रुख अपनाया है। आमतौर पर फरवरी को सर्दी और गर्मी के बीच संतुलित “वसंती मौसम” माना जाता है, लेकिन इस बार प्रदेश में दिन के तापमान में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी और बादलों की आवाजाही ने मौसम को अचानक बदल दिया है।
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अधिकतम तापमान सामान्य से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक अधिक बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ की कमी और अपेक्षित वर्षा न होने के कारण यह स्थिति बनी है, जिसका असर कृषि पर भी पड़ सकता है।
IMD के आंकड़ों में क्या सामने आया?
आईएमडी चंडीगढ़ और हरियाणा कृषि मौसम विभाग के मुताबिक फरवरी के शुरुआती दिनों में प्रदेश में न तो मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहा और न ही सामान्य बारिश देखने को मिली। इसी वजह से दिन में गर्मी बढ़ी और रात के तापमान में भी अपेक्षित गिरावट नहीं आ पाई।
हिसार में देर रात बूंदाबांदी, कई जिलों में बदला मौसम
मंगलवार देर रात हिसार में हल्की बूंदाबांदी दर्ज की गई। वहीं अन्य जिलों में बादलों की आवाजाही के कारण मौसम लगातार परिवर्तनशील बना रहा। लोगों को हल्की ठंड का अहसास हुआ, लेकिन तापमान अब भी सामान्य से ऊपर बना हुआ है।
17 फरवरी के बाद मौसम में बड़ा बदलाव संभव
मौसम विभाग ने संभावना जताई है कि 17 फरवरी के बाद हरियाणा में मौसम एक बार फिर करवट ले सकता है। इस दौरान प्रदेश में धुंध और कोहरे की स्थिति बन सकती है, जिससे बढ़ते तापमान से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
कृषि विशेषज्ञों ने क्या कहा?
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार मौजूदा बदलाव का असर केवल आमजन जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि क्षेत्र पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों की ओर सक्रिय हो रहा है, जिससे हिमालयी इलाकों में बर्फबारी और हल्की बारिश की संभावना है। हालांकि, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर जैसे मैदानी क्षेत्रों में व्यापक वर्षा के संकेत नहीं हैं।
हरियाणा में हल्की बारिश की संभावना
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश में बड़े स्तर पर बारिश भले न हो, लेकिन बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है और कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
किसानों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
मौसम में इस तरह के असामान्य बदलाव से फसलों पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अधिक तापमान और बारिश की कमी से गेहूं व सरसों जैसी रबी फसलों पर असर पड़ सकता है। वहीं अगर अचानक धुंध या कोहरा बढ़ता है, तो फसलों में रोग लगने का खतरा भी बढ़ सकता है।
फिलहाल मौसम विभाग की नजर आगामी पश्चिमी विक्षोभ पर बनी हुई है, जिससे प्रदेश को कुछ राहत मिलने की उम्मीद की जा रही है।