उन्ना। पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने प्रदेश में बढ़ते वित्तीय संकट और सरकार की कथित गलत नीतियों को लेकर कांग्रेस सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि प्रदेश सरकार की मिसमैनेजमेंट और भ्रष्टाचार के कारण राज्य के खजाने पर भारी बोझ पड़ रहा है।
राजेंद्र राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय में ऐसे कर्मचारियों की भर्ती हो रही है जिनकी वास्तव में जरूरत नहीं है। सरकारी मामलों के लिए बाहर से वकीलों को हायर किया जा रहा है, जिससे जनता के टैक्सपेयर के पैसे बर्बाद हो रहे हैं। उन्होंने पीआर विभाग पर भी सवाल उठाए और कहा कि प्रदेश सरकार हर महीने 15 लाख रुपये उत्तर प्रदेश की एक एजेंसी को पब्लिसिटी के लिए दे रही है।
पूर्व विधायक ने कहा कि प्रदेश में हर मंत्री के लिए सोशल मीडिया कर्मियों की तैनाती की गई है, जिन पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने तीन साल के कार्यकाल में 50,000 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है और ठेकेदारों को बकाया भुगतान नहीं किया जा रहा।
राणा ने हेल्थ डिपार्टमेंट में भ्रष्टाचार का भी जिक्र किया और कहा कि डॉक्टरों की पोस्टिंग में भी घपला हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रेजरी केवल बड़े ठेकेदारों के लिए खुलती है, जबकि छोटे ठेकेदारों की पेमेंट नहीं की जा रही।
पूर्व विधायक ने हिमाचल के मुख्यमंत्री द्वारा चंडीगढ़ के फाइव स्टार होटल में ठहरने को लेकर भी सवाल उठाए। राणा ने पूछा कि क्या यह खर्च प्रदेश सरकार के खाते से किया जा रहा है और क्यों मुख्यमंत्री सरकारी आवास की बजाय होटल में रुक रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बोर्डों और निगमों में मुख्यमंत्री के मित्रों को बैठाया जा रहा है और उनके लिए सरकारी खजाने का उपयोग किया जा रहा है।
राजेंद्र राणा ने कहा कि जनता के लिए खजाना बंद है, लेकिन मुख्यमंत्री और उनके मित्रों के लिए सरकारी संसाधनों का उपयोग हो रहा है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि कांग्रेस सरकार द्वारा सत्ता में आने से पहले दी गई 10 गारंटियों का क्या हुआ, और क्या इन्हें केंद्र सरकार से पूछकर ही दिया गया था।
पूर्व विधायक ने कहा कि प्रदेश सरकार के कर्ज, भ्रष्टाचार और वित्तीय अनुशासनहीनता के कारण हिमाचल गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।