Summer Express, चंडीगढ़। हरियाणा में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनाव में हर एक विधायक का वोट बेहद अहम माना जा रहा है, ऐसे में सभी दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं। खासतौर पर इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के दो विधायकों के वोटों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं, जो चुनाव के परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।
इनेलो फिलहाल किसी भी दल के समर्थन में खुलकर सामने नहीं आई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता संपत सिंह का कहना है कि इस मुद्दे पर पार्टी की बैठक के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। माना जा रहा है कि मतदान के दिन इनेलो का रुख स्पष्ट होगा, जो प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है।
इस बीच भाजपा भी अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है। पार्टी ने केंद्रीय मंत्री और गुजरात के नेता हर्ष सांघवी को चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। सांघवी , पंचकूला पहुंचे और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित प्रदेश सरकार के कई मंत्री भी मौजूद रहे। देर रात तक चली बैठक में नेताओं और विधायकों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं। यह भी तय किया गया कि 13 मार्च से पार्टी के प्रमुख नेता चंडीगढ़ में डेरा डालकर चुनावी मोर्चा संभालेंगे। बताया जा रहा है कि हर्ष सांघवी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का करीबी माना जाता है और उन्होंने प्रदेश के नेताओं से फीडबैक लेने के बाद दिल्ली लौट गए।
दूसरी ओर कांग्रेस और इनेलो के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। दोनों दल एक-दूसरे पर भाजपा की ‘बी टीम’ होने का आरोप लगाते रहे हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने कहा था कि यदि इनेलो भाजपा या उसके समर्थित उम्मीदवार को वोट देती है तो इससे साफ हो जाएगा कि असल में भाजपा की बी टीम कौन है।
हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए इस बार तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। भाजपा की ओर से संजय भाटिया उम्मीदवार हैं, जबकि कांग्रेस ने कर्मवीर बौद्ध को मैदान में उतारा है। वहीं भाजपा से जुड़े नेता सतीश नांदल निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार एक सीट पर भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि दूसरी सीट पर कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच कड़ा मुकाबला होने की संभावना है। यदि कांग्रेस अपने सभी विधायकों के वोट सुरक्षित रखने में सफल रहती है तो उसकी जीत की संभावना मजबूत मानी जा रही है।
इधर कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए नई रणनीति बनाई है। सूत्रों के मुताबिक 13 मार्च को कांग्रेस विधायक दल के सदस्यों को हिमाचल प्रदेश भेजने की योजना बनाई गई है और इसके लिए बसें भी बुक कर दी गई हैं। इससे पहले हुई विधायक दल की बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं बन पाई थी, क्योंकि कुछ विधायकों ने निजी कारणों का हवाला दिया था। अब संशोधित योजना के तहत 13 मार्च को विधायकों को हिमाचल भेजा जा सकता है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी बी.के. हरिप्रसाद 12 मार्च को चंडीगढ़ पहुंचेंगे और संभव है कि वे भी विधायकों के साथ हिमाचल प्रदेश जाएं।