Summer Express , नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने आइपैक पर ईडी के छापे के दौरान बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा हस्तक्षेप करने के मामले में ईडी की याचिका का विरोध कर रही पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्रीय एजेंसी के काम में किसी तरह की बाधा उत्पन्न होती है, तो एजेंसी को अपने तरीके से समाधान निकालने का अधिकार होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि अगर कोई मुख्यमंत्री किसी केंद्रीय विभाग में जबरदस्ती प्रवेश करता है और एजेंसी को इसके खिलाफ याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है, तो ऐसे मामलों में निर्णय कौन करेगा। जस्टिस पीके मिश्र और एनवी अंजारिया की पीठ ने यह टिप्पणी तब की जब बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ईडी की याचिका का विरोध कर रहे थे।
कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी मुख्यमंत्री द्वारा सरकारी कार्यालय में हस्तक्षेप की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि अनुच्छेद 32 और 226 के तहत याचिका दाखिल नहीं हो सकती, तो एजेंसी को विधिक उपायों का अधिकार होना जरूरी है।
ईडी की याचिका में सीबीआइ से केस दर्ज करने की मांग शामिल है। सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि याचिका संरक्षक के तौर पर दाखिल की गई है और इसमें शिड्यूल अपराध की चर्चा नहीं है, बल्कि आइपैक छापे के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा बाधा डालने के मामले में कार्रवाई की मांग है।
ममता बनर्जी के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि अनुच्छेद 32 केवल मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर याचिका के लिए है, इसलिए ईडी की यह मांग न्यायसंगत नहीं है।
कोर्ट ने बंगाल सरकार को फटकारते हुए कहा कि वह कोर्ट को निर्देश नहीं दे सकती और जो रिकॉर्ड पर है, वही विचाराधीन होगा। इस मामले में मंगलवार को सुनवाई फिर से होगी।
इस आदेश से स्पष्ट हो गया है कि केंद्रीय एजेंसियों के काम में हस्तक्षेप को गंभीरता से लिया जाएगा और किसी भी बाधा के मामले में एजेंसी को स्वतः समाधान निकालने का अधिकार रहेगा।