वॉशिंगटन | ईरान और इज़राइल के बीच चला 12 दिनों का सैन्य संघर्ष अब खत्म हो चुका है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में अब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया, लेकिन एक नई रिपोर्ट इस दावे की हकीकत पर सवाल खड़े कर रही है।
रिपोर्ट में खुलासा: पूरी तरह नहीं तबाह हुए ठिकाने
एक अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हमले से ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह नष्ट नहीं हुआ, बल्कि कुछ महीनों के लिए उसकी गतिविधियाँ धीमी जरूर हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हमले से पहले ही ईरान ने करीब 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया था, जिससे उसकी रणनीतिक तैयारी पर आंशिक असर पड़ा।
ट्रंप का दावा: ‘इतिहास का सबसे सफल हमला’
इन खुलासों के बीच ट्रंप ने मीडिया रिपोर्टों को खारिज करते हुए X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि, “यह अमेरिका का सबसे प्रभावशाली सैन्य ऑपरेशन था। ईरान के परमाणु ठिकाने पूरी तरह तबाह कर दिए गए हैं।” वहीं, पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने पुष्टि की कि ईरान पर भारी बमबारी की गई थी, जिनमें से कुछ बमों का वजन 30,000 पाउंड (करीब 13,600 किलोग्राम) था।
फिर से सक्रिय हो सकता है ईरान का परमाणु मिशन?
हालिया रिपोर्टों से यह संकेत भी मिल रहे हैं कि ईरान निकट भविष्य में एक बार फिर से अपने परमाणु कार्यक्रम को सक्रिय कर सकता है। हालांकि अमेरिका और खाड़ी देशों ने इस पर सख्त रुख अपनाया है। वाशिंगटन ने स्पष्ट कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने दिए जाएंगे।
इज़राइल ने दी चेतावनी
इज़राइल ने भी साफ कर दिया है कि अगर ईरान ने दोबारा परमाणु गतिविधियों को शुरू किया, तो वह फिर से सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। दोनों देशों के बीच हुए हालिया टकराव ने पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ा दी है और वैश्विक सुरक्षा पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।