Summer Express, शिमला। हिमाचल प्रदेश कैबिनेट ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए तय किया है कि चिट्टा (सिंथेटिक ड्रग) से जुड़े मामलों में आरोपी व्यक्ति अब पंचायत चुनाव में भाग नहीं ले पाएंगे। इस फैसले के तहत भले ही आरोपी को कोर्ट में दोषी न ठहराया गया हो या मामले की चार्जशीट पेश की गई हो, वह चुनाव नहीं लड़ सकेगा। मादक पदार्थ निषेध अधिनियम के अन्य मामलों के आरोपी इस दायरे में शामिल नहीं होंगे।
कैबिनेट ने इस फैसले को मंजूरी दे दी है और इसे हिमाचल प्रदेश विधानसभा में विधेयक के रूप में पेश किया जाएगा। राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद यह वर्तमान पंचायती राज चुनावों में लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में पहली बार इस तरह की व्यवस्था लागू की जा रही है, जिसका उद्देश्य पंचायत चुनाव को सुरक्षित और निष्पक्ष बनाना है।
इसके अलावा कैबिनेट ने पंचायत चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अन्य बदलावों को भी मंजूरी दी है। ग्राम सभा का कोरम पहले एक चौथाई था, जिसे अब बढ़ाकर 1:10 कर दिया गया है। इससे 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी मतदाता ग्राम सभा में उपस्थित होकर निर्णय लेने में भाग ले सकेंगे।
शिक्षा क्षेत्र में भी कई अहम फैसले लिए गए हैं। सीबीएसई से संबद्ध सरकारी स्कूलों का अलग कैडर तैयार किया गया है, जिसमें स्कूलों की संख्या 151 कर दी गई है। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेजों में इंटर कॉलेज स्थापित करने की मंजूरी भी दी गई है। टांडा मेडिकल कॉलेज के लिए पेट स्कैन मशीन खरीदने की स्वीकृति भी कैबिनेट ने प्रदान की है।
राज्य प्रशासन ने पंचायती राज संस्थाओं की त्रिस्तरीय प्रणाली के तहत चुनाव तैयारियों को तेज करने के निर्देश दिए हैं। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार 31 मई से पहले चुनाव संपन्न कराने के लिए 30 मार्च तक आरक्षण रोस्टर और मतदाता सूची तैयार करने का समय दिया गया है।
इस फैसले से न केवल नशा तस्करों को चुनावी गतिविधियों से दूर रखा जाएगा, बल्कि पंचायत चुनाव में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को भी सुदृढ़ किया जाएगा।