Summer Express,चंडीगढ़। निजी बैंकों में सरकारी धन के दुरुपयोग और गबन के मामलों के सामने आने के बाद हरियाणा सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। वित्त विभाग ने सभी प्रशासनिक विभागों, बोर्ड और निगमों को निर्देश जारी करते हुए उनके बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) का पूरा विवरण निर्धारित समयसीमा में उपलब्ध कराने को कहा है।
हाल ही में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक से जुड़े मामलों में सरकारी राशि के दुरुपयोग की घटनाएं सामने आई थीं। इन मामलों में आरोप है कि विभागों का पैसा निजी बैंकों में जमा था, जिसे बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से रियल एस्टेट और ज्वेलरी जैसे क्षेत्रों में निवेश कर दिया गया। इन घटनाओं के बाद सरकार ने वित्तीय निगरानी को और सख्त करने का निर्णय लिया है।
वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने विभागों के बैंक खातों और एफडी से संबंधित पूरी जानकारी तय प्रारूप में तीन दिन के भीतर उपलब्ध कराएं। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि विभागों से प्राप्त जानकारी पहले संबंधित प्रशासनिक विभाग स्तर पर संकलित की जाएगी और उसके बाद ही आगे भेजी जाएगी। नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
सरकार ने यह भी माना है कि वर्ष 2025 में जारी निर्देशों के बावजूद कई विभागों ने अधूरी या गलत प्रारूप में जानकारी भेजी थी। कुछ फील्ड कार्यालयों ने सीधे वित्त विभाग को डेटा भेज दिया, जिससे प्रक्रिया प्रभावित हुई। इस पर नाराजगी जताते हुए वित्त विभाग ने कहा कि ऐसी कार्यप्रणाली नियमों के खिलाफ है और इससे आंकड़ों की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ता है।
नए निर्देशों के अनुसार, सभी विभागों को 20 मार्च 2026 तक की स्थिति के आधार पर अपने खातों और एफडी का विवरण 5 अप्रैल 2026 तक अनिवार्य रूप से जमा कराना होगा। इसके लिए एक विस्तृत प्रारूप भी जारी किया गया है, जिसमें बैंक खाता संख्या, खाता खोलने की तिथि, बैंक और शाखा का नाम, मौजूदा बैलेंस, खाते का प्रकार और वित्त विभाग से अनुमति की स्थिति जैसी जानकारियां शामिल हैं। वहीं एफडी के लिए जमा राशि, ब्याज दर, परिपक्वता तिथि सहित अन्य विवरण देना अनिवार्य किया गया है।
सरकार के इस कदम को वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने और भविष्य में ऐसे घोटालों पर रोक लगाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।