हमीरपुर-:हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में पुलिस ने नकली करेंसी के अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से हजारों रुपये के जाली नोट बरामद हुए हैं, जो प्रदेश के अलग-अलग जिलों में खपाए जा रहे थे।हमीरपुर पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। शुक्रवार को पुलिस टीम ने नकली करेंसी के कारोबार से जुड़े एक गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया।
जानकारी के अनुसार, आरोपी हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में घूम-घूमकर नकली नोटों को असली के रूप में चलाकर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे थे। खास तौर पर छोटे दुकानदारों और बुजुर्गों को निशाना बनाया जा रहा था।मामले का खुलासा तब हुआ जब 9 अप्रैल को हमीरपुर के पास लोहारडा बायपास पर एक 74 वर्षीय दुकानदार को आरोपियों ने ठग लिया। उन्होंने 500 रुपये के असली नोट के बदले 200 रुपये के जाली नोट देकर उसे धोखा दिया।दुकानदार को जब नोटों पर शक हुआ तो उसने तुरंत सदर थाना में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत मिलते ही पुलिस हरकत में आई और जांच शुरू की गई।
पुलिस ने मामले की जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी निगरानी, बैंक रिकॉर्ड और लोकेशन ट्रैकिंग की मदद से आरोपियों की गाड़ी की पहचान की।
शुक्रवार को जब पुलिस को सूचना मिली कि संदिग्ध वाहन बिलासपुर क्षेत्र में मौजूद है, तो एक टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गाड़ी सहित पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि आरोपी मनाली की ओर जा रहे थे।तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से 500 रुपये के 16 जाली नोट और 200 रुपये के 33 जाली नोट बरामद किए।प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी पिछले कई दिनों से प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में घूमकर नकली करेंसी फैला रहे थे।हमीरपुर के एसपी बलबीर सिंह ने बताया कि यह एक अंतरराज्यीय गिरोह है और इसके तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। फिलहाल दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया है और उनसे पूछताछ जारी है।पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस गिरोह का नेटवर्क कहां तक फैला हुआ है और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
एसपी ने आम लोगों और दुकानदारों से अपील की है कि किसी भी नोट को लेते या देते समय उसकी अच्छी तरह जांच करें, ताकि इस तरह की ठगी से बचा जा सके।हमीरपुर पुलिस की इस कार्रवाई को बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। अब जांच के बाद यह साफ होगा कि इस नकली करेंसी गिरोह का नेटवर्क कितना बड़ा है और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।