शिमला,संजू-:हिमाचल प्रदेश की राजनीति में महिला आरक्षण और महिला प्रतिनिधित्व को लेकर बयानबाज़ी तेज हो गई है। हाल ही में सांसद कंगना रणौत के एक बयान पर विवाद खड़ा हो गया, जिसमें उन्होंने हिमाचल विधानसभा में खुद को एकमात्र महिला प्रतिनिधि जैसा प्रस्तुत किया। इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें जमकर आलोचना का सामना करना पड़ा।
इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए लोकनिर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कड़ा तंज कसा है। उन्होंने कंगना के बयान को “हास्यास्पद” बताते हुए कहा कि एक सांसद को अपने ही राज्य की विधानसभा की बुनियादी जानकारी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में हिमाचल विधानसभा में तीन महिला विधायक हैं—एक भाजपा से और दो कांग्रेस से—ऐसे में कंगना का बयान तथ्यों से परे है।विक्रमादित्य सिंह ने आगे कहा कि जो व्यक्ति यह नहीं जानता कि विधानसभा में कितनी महिला विधायक हैं, उसका महिला सशक्तिकरण पर बात करना गंभीरता से नहीं लिया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल राजनीतिक बयानबाज़ी है, जिसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।
महिला आरक्षण बिल पर बोलते हुए उन्होंने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा महिला आरक्षण के पक्ष में रही है और 2023 में लाए गए बिल को भी समर्थन देने को तैयार थी, बशर्ते उसे उसी रूप में संसद में पारित किया जाता। लेकिन उनके अनुसार केंद्र सरकार ने इसे राजनीतिक लाभ के लिए अलग तरीके से पेश किया, जिससे विपक्ष ने इसका विरोध किया और यह पारित नहीं हो सका।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस बिल के माध्यम से राजनीतिक और सामाजिक समीकरण बदलने की कोशिश कर रही थी। उनके मुताबिक भाजपा महिलाओं के हितैषी होने का दिखावा कर रही है और चुनावी लाभ के लिए इस मुद्दे को उछाल रही है।अंत में उन्होंने कहा कि जब कई राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे थे, उसी समय लोकसभा सत्र बुलाकर महिला आरक्षण बिल को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई, जिससे स्पष्ट होता है कि इसके पीछे राजनीतिक मंशा थी।