सिरसा में यूरिया घोटाले का आरोप, किसानों ने गोदाम में पकड़ी कथित कालाबाजारी

Chandrika
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सिरसा, विजय कुमार -:हरियाणा के सिरसा जिले में किसानों के लिए सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जाने वाली यूरिया खाद की कथित कालाबाजारी का मामला सामने आया है। भारतीय किसान एकता के कार्यकर्ताओं ने गांव रामनगरिया में एक गोदाम पर पहुंचकर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। किसानों का दावा है कि सरकारी सब्सिडी वाली यूरिया की पैकिंग बदलकर उसे राजस्थान भेजा जा रहा था। मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। किसानों ने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

सिरसा के गांव रामनगरिया में उस समय हड़कंप मच गया जब भारतीय किसान एकता की टीम ने एक गोदाम में कथित तौर पर चल रही यूरिया खाद की कालाबाजारी का खुलासा करने का दावा किया। संगठन के कार्यकर्ताओं और स्थानीय किसानों का आरोप है कि किसानों के लिए सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जाने वाली यूरिया को गोदाम में लाकर उसकी पैकिंग बदली जा रही थी।किसानों के मुताबिक, सरकारी यूरिया के कट्टों से खाद निकालकर दूसरे बैगों में भरी जा रही थी और फिर उसे राजस्थान के कोटा सहित अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भेजा जा रहा था। किसानों का आरोप है कि इस यूरिया का इस्तेमाल औद्योगिक इकाइयों और शराब फैक्ट्रियों में किया जा रहा था, जबकि यह खाद मूल रूप से किसानों के लिए निर्धारित थी।छापेमारी के दौरान किसानों ने गोदाम परिसर और उसके आसपास से सरकारी यूरिया के खाली कट्टों के जले हुए अवशेष मिलने का भी दावा किया। उनका कहना है कि सबूत मिटाने के लिए इन कट्टों को जलाया गया होगा। किसानों ने मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी, जिसके बाद पुलिस टीम ने स्थल का निरीक्षण किया और जांच शुरू की।

भारतीय किसान एकता के प्रदेश अध्यक्ष लखविंदर औलख ने आरोप लगाया कि किसानों को लगभग 270 रुपये में मिलने वाली सब्सिडी वाली यूरिया को पैकिंग बदलकर दोगुनी कीमत या उससे अधिक दरों पर बेचा जा रहा है। उनका कहना है कि इस तरह की गतिविधियों के कारण किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जिससे खेती प्रभावित हो रही है।

किसान नेताओं ने कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि विभाग की निगरानी में कमी और लापरवाही के कारण ऐसे अवैध कारोबार को बढ़ावा मिल रहा है। किसानों का कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण और सख्त कार्रवाई की जाती तो इस तरह के मामलों पर पहले ही रोक लगाई जा सकती थी।भारतीय किसान एकता ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और इसमें शामिल अधिकारियों, दुकानदारों तथा अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो किसानों को अपने हक के लिए सड़क पर उतरना पड़ेगा और प्रदेश स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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