Summer express/बिलासपुर, सुभाष -: जिला बिलासपुर के घुमारवीं उपमंडल की ग्राम पंचायत लंझता आज प्रदेश में सफल फलोत्पादन का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी है। जहां कभी किसान पारंपरिक खेती तक ही सीमित थे, वहीं अब गांव की पहचान उच्च गुणवत्ता वाली लीची की बागवानी से होने लगी है। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी एचपी शिवा परियोजना के माध्यम से शुरू की गई इस पहल ने न केवल खेती के स्वरूप को बदला है बल्कि किसानों को आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई दिशा भी प्रदान की है। वर्षों पहले लगाए गए लीची के पौधे अब फल देने लगे हैं और किसानों की मेहनत रंग लाती दिखाई दे रही है।
लंझता गांव में इस परिवर्तन की नींव वर्ष 2019-20 में रखी गई थी, जब गांव को एचपी शिवा परियोजना के अंतर्गत फ्रंट लाइन डेमोस्ट्रेशन (एफएलडी) के लिए चयनित किया गया। प्रारंभिक चरण में किसानों की भागीदारी के साथ 500 लीची के पौधों का रोपण किया गया। परियोजना के सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद अगले दो वर्षों 2020-21 और 2021-22 में इस अभियान का विस्तार किया गया। इस दौरान 9,505 अतिरिक्त पौधे लगाए गए। आज स्थिति यह है कि लगभग 13.5 हेक्टेयर क्षेत्र में 54 किसान 10 हजार से अधिक लीची के पौधों की वैज्ञानिक तरीके से देखभाल कर रहे हैं। यह पूरा क्षेत्र अब एक संगठित लीची क्लस्टर के रूप में विकसित हो चुका है।फलोत्पादन की सफलता केवल पौधे लगाने से नहीं बल्कि उनकी उचित देखभाल, सिंचाई और संरक्षण पर निर्भर करती है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए परियोजना के अंतर्गत किसानों को आधुनिक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। पौधों की नियमित सिंचाई के लिए एक लाख लीटर क्षमता का बड़ा जल भंडारण टैंक बनाया गया है। इसके अलावा 20-20 हजार लीटर क्षमता वाले सात अन्य जल टैंक भी स्थापित किए गए हैं, जिससे पूरे क्लस्टर में सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित हुई है। बागवानी विभाग के विशेषज्ञ समय-समय पर किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों, पौध संरक्षण, उर्वरक प्रबंधन और रोग नियंत्रण संबंधी प्रशिक्षण भी प्रदान कर रहे हैं। इन सुविधाओं के कारण किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा है और पौधों का विकास भी बेहतर हुआ है।
इस परियोजना से जुड़े किसान प्रकाश चंद इसकी सफलता का जीवंत उदाहरण हैं। उन्होंने अपनी भूमि में लगभग 850 लीची के पौधे लगाए हैं। उनका कहना है कि शुरुआत में उन्हें यह विश्वास नहीं था कि इतने बड़े स्तर पर लीची की खेती सफल हो पाएगी, लेकिन आज पौधों पर फल देखकर उनकी वर्षों की मेहनत सफल होती दिखाई दे रही है। उनके अनुसार वर्तमान में उत्पादन सीमित है क्योंकि पौधे अभी पूरी तरह परिपक्व नहीं हुए हैं, लेकिन आने वाले वर्षों में उत्पादन बढ़ने के साथ उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उनका मानना है कि लीची की खेती भविष्य में परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने का प्रमुख आधार बनेगी।इसी प्रकार लाभार्थी किसान लता देवी ने अपनी भूमि में 834 लीची के पौधे लगाए हैं। पिछले वर्ष से उनके पौधों पर अच्छी गुणवत्ता के फल आने शुरू हो गए हैं। वह बताती हैं कि वैज्ञानिक पद्धति से की जा रही बागवानी ने उन्हें खेती के प्रति नया विश्वास दिया है। उनका कहना है कि जैसे-जैसे पौधे परिपक्व होंगे, उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि होगी। लता देवी का मानना है कि लीची जैसी व्यावसायिक फसलों ने ग्रामीण महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भर बनने के नए अवसर पैदा किए हैं। इससे महिलाएं खेती में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
किसानों के अनुसार पिछले वर्ष इस लीची क्लस्टर से लगभग 12 से 15 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ था। हालांकि इस वर्ष मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण उत्पादन घटकर लगभग 4 से 5 क्विंटल रह गया। इसके बावजूद किसानों का उत्साह कम नहीं हुआ है। उनका कहना है कि पौधों की आयु बढ़ने के साथ उत्पादन में स्वाभाविक वृद्धि होगी और आने वाले वर्षों में यह क्लस्टर कहीं अधिक बेहतर परिणाम देगा। उनका विश्वास है कि भविष्य में यह क्षेत्र बड़े पैमाने पर व्यावसायिक लीची उत्पादन के लिए पहचाना जाएगा।
उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार लंझता में पहले चरण में फ्रंट लाइन डेमोस्ट्रेशन तथा दूसरे चरण में पीआरएफ क्लस्टर विकसित किया गया है। पूरे क्षेत्र में उच्च घनत्व (हाई डेंसिटी) तकनीक के आधार पर पौधरोपण किया गया है, जिससे सीमित भूमि पर अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके। विभाग किसानों को नियमित प्रशिक्षण, तकनीकी सलाह और वैज्ञानिक मार्गदर्शन उपलब्ध करा रहा है। इसके अलावा जंगली जानवरों तथा बेसहारा पशुओं से पौधों की सुरक्षा के लिए पूरे क्लस्टर में मजबूत बाड़बंदी भी की गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना भविष्य में किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार का कहना है कि एचपी शिवा परियोजना ग्रामीण विकास और कृषि क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन का प्रभावी उदाहरण है। उनके अनुसार यदि सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, आधुनिक तकनीक और किसानों की मेहनत एक साथ जुड़ जाए तो गांवों की आर्थिक तस्वीर बदली जा सकती है। लंझता में विकसित लीची क्लस्टर इसी सोच का परिणाम है, जिसने पारंपरिक खेती को व्यावसायिक बागवानी में बदलने की दिशा में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि सरकारी योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से पात्र किसानों तक पहुंचे, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर विकसित हो सकें। प्रशासन संबंधित विभागों के माध्यम से परियोजनाओं की नियमित निगरानी कर रहा है, जिससे किसानों को तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाएं समय पर मिलती रहें।
आज लंझता गांव के हरे-भरे लीची के बाग केवल फलों का उत्पादन नहीं कर रहे, बल्कि वे ग्रामीण विकास, आधुनिक कृषि और किसानों की बदलती सोच का प्रतीक बन चुके हैं। एचपी शिवा परियोजना के माध्यम से शुरू हुआ यह प्रयास आने वाले वर्षों में न केवल जिले बल्कि पूरे प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनने की क्षमता रखता है। वैज्ञानिक खेती, सरकारी सहयोग और किसानों की लगन ने यह सिद्ध कर दिया है कि योजनाबद्ध प्रयासों से कृषि क्षेत्र में स्थायी आर्थिक समृद्धि हासिल की जा सकती है।