Summer express, अंकुर कपूर,अंबाला | अंबाला शहर के विधायक चौधरी निर्मल सिंह ने आज एक प्रेस बयान जारी कर स्थानीय प्रशासन और सरकार की जल निकासी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अंबाला शहर में पानी की निकासी के लिए आज तक कोई ठोस मास्टर प्लान तैयार नहीं किया गया। यही कारण है कि थोड़ी सी बरसात होते ही पूरा अंबाला शहर डूब जाता है और स्थानीय जनता को भारी आर्थिक नुकसान सहना पड़ता है।
दिखावे के निर्माण पर खर्च हुए करोड़ों रुपये
विधायक चौधरी निर्मल सिंह ने कहा कि शहर में दिखाने के लिए बहुत सी नालियों और नालों का निर्माण तो किया गया, लेकिन बिना किसी मास्टर प्लान के किए गए इस काम के कारण करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद धरातल पर स्थिति बेहद नाजुक है। मानसून की हल्की बारिश में भी पूरा शहर जलमग्न (पानी-पानी) हो जाता है।
आउटर नालों के निरीक्षण में खुली पोल
चौधरी निर्मल सिंह ने बताया कि उन्होंने कुछ दिन पहले शहर के बाहरी (आउटर) नालों का विस्तृत दौरा किया था। इस दौरान एक बेहद चौंकाने वाली तकनीकी खामी सामने आई: शहर के नालों से 3-4 फीट ऊंचे हैं आउटर नाले: निरीक्षण में देखा गया कि बाहर के नालों की ऊंचाई शहर के अंदरूनी नालों के मुकाबले लगभग 3 से 4 फीट ऊंची है। सिल्ट (गाद) निकालना नामुमकिन: नालों की बनावट ऐसी है कि उनमें से सिल्ट निकालना बेहद मुश्किल है।
अंदर पानी का जमाव, बाहर सूखा: अभी हाल में किये दौरे का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि शहर के अंदरूनी नालों में तो पानी लबालब खड़ा है, लेकिन जहां इस पानी शहर से आउटसोर्स (बाहर) होना है, वहां एक बूंद पानी नहीं है। इसका सीधा मतलब है कि शहर के बाहर के नाले ऊंचे हैं और शहर के अंदर के नीचे, जिससे पानी शहर के भीतर ही घूमता रहता है और पानी ओवरफ्लो होने के बाद ही बाहर निकल पाता है।
चौधरी निर्मल सिंह का सुझाव: “अगर इन बाहरी नालों को शहर के वॉटर लेवल से 3 से 4 फीट नीचे करके दोबारा निर्मित किया जाए, तो अंबाला शहर कभी नहीं डूबेगा। यदि समय रहते आउटर नालों की गाद निकाल ली जाती, तो आज शहरवासियों को इस जलभराव से न जूझना पड़ता।”
विधानसभा सत्र में उठाएंगे मांग, खुद तैयार करेंगे मास्टर प्लान
विधायक ने घोषणा की कि वे जल्द ही अपने तकनीकी साथियों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर अंबाला शहर की जल निकासी का एक सटीक मास्टर प्लान तैयार करेंगे।
इसके साथ ही, आगामी विधानसभा सत्र में वे अंबाला शहर को इस समस्या से स्थाई मुक्ति दिलाने के लिए निम्नलिखित मांगों को पुरजोर तरीके से उठाएंगे:
पक्के ड्रेनेज का निर्माण: अंबाला शहर से बाहर जा रही ड्रेनेज (निकासी व्यवस्था) को पूरी तरह से पक्का किया जाए। 15 फुट चौड़ी पगडंडी (सड़क): ड्रेनेज के साथ-साथ एक 15 फुट चौड़ी पगडंडी बनाई जाए, ताकि भविष्य में नालों की सफाई आउटर से शुरू होकर शहर के बीचो-बीच तक मशीनों द्वारा आसानी से की जा सके। उन्होंने अंत में कहा कि वर्षों से बाढ़ और जलभराव का दंश झेल रहे अंबाला शहर को डूबने से बचाना और लोगों के आर्थिक व माली नुकसान को रोकना ही उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।