Summer express/शिमला, संजू -: कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने ई20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। शिमला में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान राठौर ने आरोप लगाया कि सरकार बिना पर्याप्त वैज्ञानिक परीक्षण और स्पष्ट नतीजों के ई20 पेट्रोल को बढ़ावा देकर आम लोगों की गाड़ियों को एक तरह से “प्रयोगशाला” में बदल रही है। उन्होंने कहा कि इस प्रयोग का सबसे बड़ा खामियाजा वाहन मालिकों, किसानों और बागवानों को उठाना पड़ रहा है।
राठौर ने कहा कि ई20 पेट्रोल को लेकर देशभर में लगातार सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने बताया कि 30 जून को यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा था। उनके अनुसार, अदालत में अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया की ओर से यह कहा गया कि ई20 पेट्रोल अभी परीक्षण के चरण में है और इसे पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। राठौर ने सवाल उठाया कि यदि यह केवल एक प्रयोग है तो इसे पूरे देश के उपभोक्ताओं पर क्यों लागू किया जा रहा है। उनका कहना था कि किसी भी नई तकनीक या ईंधन का परीक्षण सीमित स्तर पर किया जाना चाहिए, न कि करोड़ों लोगों की गाड़ियों पर।
कांग्रेस प्रवक्ता ने दावा किया कि ई20 पेट्रोल वाहनों के इंजन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके इस्तेमाल से इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है और माइलेज में भी कमी देखी जा रही है। राठौर ने कहा कि कई वाहन मालिक इस ईंधन के कारण अतिरिक्त मरम्मत खर्च उठाने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार इस ईंधन को प्रयोग के तौर पर लागू कर रही है तो जिन लोगों की गाड़ियों को नुकसान हो रहा है, उनके नुकसान की भरपाई कौन करेगा।राठौर ने आरोप लगाया कि सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि ई20 पेट्रोल से कोई नुकसान नहीं हो रहा, जबकि दूसरी ओर लोगों की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इथेनॉल मिश्रण के बावजूद पेट्रोल की कीमतों में कोई राहत नहीं दी गई। उनका कहना था कि यदि उत्पादन लागत में बदलाव आया है तो उसका लाभ उपभोक्ताओं तक भी पहुंचना चाहिए। उन्होंने तेल कंपनियों के मुनाफे का हवाला देते हुए कहा कि पिछले वित्तीय वर्षों में कंपनियों के लाभ में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जबकि आम जनता पर आर्थिक बोझ कम नहीं हुआ।
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की इस नीति से कुछ कंपनियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जब तक ई20 पेट्रोल के प्रभावों पर पूरी तरह पारदर्शी और स्वतंत्र अध्ययन सामने नहीं आते, तब तक सरकार को इसे अनिवार्य रूप से लागू करने से बचना चाहिए। उन्होंने मांग की कि लोगों को शुद्ध पेट्रोल और इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल में से अपनी आवश्यकता के अनुसार विकल्प चुनने की स्वतंत्रता दी जाए।राठौर ने कहा कि विशेष रूप से पुरानी गाड़ियों, दोपहिया वाहनों, किसानों और बागवानों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कृषि उपकरणों पर इस ईंधन का प्रभाव अधिक पड़ सकता है। उनका कहना था कि इन वर्गों को अतिरिक्त आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है, इसलिए सरकार को उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे को लेकर कई स्थानों पर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो चुके हैं।
पत्रकार वार्ता के दौरान कुलदीप राठौर ने प्रदेश में शुरू हो चुके सेब सीजन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम को देखते हुए सरकार को सड़कों की स्थिति सुधारने और परिवहन व्यवस्था सुचारु बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। उनका कहना था कि यदि सड़कें बाधित हुईं तो बागवानों को अपनी फसल समय पर मंडियों तक पहुंचाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो सकता है।राठौर ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने शिमला के उपायुक्त से भी चर्चा की है। उनके अनुसार, जिला प्रशासन ने सेब सीजन के दौरान सड़कों को सुचारु रखने और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि बागवानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए सड़क मरम्मत, यातायात प्रबंधन और आपदा से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए जाएं, ताकि सेब उत्पादकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।