मोनिका रावत | चंडीगढ़
समर न्यूज
अदालतों में मामलों के निष्पादन (एग्जीक्यूशन) के दौरान जमा होने वाली राशि अब निष्क्रिय नहीं पड़ी रहेगी। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की सभी निष्पादन अदालतों को निर्देश दिया है कि ऐसी प्रत्येक राशि को तत्काल किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में ब्याज वाली सावधि जमा (फिक्स्ड डिपाजिट) के रूप में रखा जाए।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अदालत की प्रक्रिया के कारण किसी भी पक्ष को आर्थिक नुकसान नहीं होना चाहिए। जस्टिस पंकज जैन ने यह आदेश धन डिक्री से जुड़े एक निष्पादन मामले में दायर सिविल पुनरीक्षण याचिका का निपटारा करते हुए दिया। यह याचिका सफीदों के अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) द्वारा 11 मार्च 2025 को पारित आदेश के खिलाफ दायर की गई थी। मामले में याचिकाकर्ता डिक्री धारक थे। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, यह अदालत आवश्यक समझती है कि पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की सभी निष्पादन अदालतों को निर्देश दिया जाए कि निष्पादन कार्यवाही में प्राप्त राशि को निष्क्रिय रखने के बजाय तत्काल राष्ट्रीयकृत बैंक में जमा कराया जाए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि अदालत की कार्रवाई के कारण किसी भी पक्ष को नुकसान न उठाना पड़े। जस्टिस जैन ने आदेश दिया कि निष्पादन कार्यवाही में जमा धनराशि को राष्ट्रीयकृत बैंक में ब्याज वाली फिक्स्ड डिपाजिट में रखा जाए।
फिक्स्ड डिपाजिट संबंधित पात्र पक्ष को हस्तांतरित की जाए। संबंधित पक्ष चाहे तो ब्याज निकाल सकता है अथवा फिक्स्ड डिपाजिट को जारी रख सकता है। अदालत ने कहा कि यदि धनराशि अदालत में बिना ब्याज के पड़ी रहती है तो बाद में इस अवधि के ब्याज को लेकर विवाद लगातार अदालतों को परेशान करते रहते हैं। इस संदर्भ में जस्टिस जैन ने टिप्पणी की, अन्यथा अदालत में जमा रहने की अवधि के ब्याज का प्रश्न लगातार अदालतों को परेशान करता रहेगा। अदालत की कार्रवाई किसी भी पक्ष के लिए पूर्वाग्रह का कारण नहीं बननी चाहिए। फैसले में हाई कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के के एल सुनेजा मामले का भी उल्लेख किया।
न्यायालय ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही सभी अदालतों और न्यायिक मंचों को ऐसे दिशा-निर्देश बनाने का आदेश दे चुका है, जिनके तहत अदालतों या
उनकी रजिस्ट्री में जमा धनराशि को बैंक अथवा वित्तीय संस्थानों में निवेश किया जाए ताकि किसी भी पक्ष को भविष्य में आर्थिक
हानि न हो। जस्टिस जैन ने आदेश दिया कि मामला आवश्यक दिशा-निर्देश तैयार करने के उद्देश्य से हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाए।