Summer express, नई दिल्ली। बहुचर्चित त्विषा शर्मा मौत मामले की जांच में नया घटनाक्रम सामने आया है। दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के मेडिकल बोर्ड ने लगभग एक महीने तक चली वैज्ञानिक जांच के बाद अपनी 11 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। न्यायालय के निर्देशों के अनुसार यह रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में जमा कराई गई है और फिलहाल इसे गोपनीय रखा गया है।
सूत्रों के अनुसार, मेडिकल बोर्ड की फॉरेंसिक, लैब और हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच में उस जिम बेल्ट पर त्वचा के ऊतकों (स्किन टिश्यू) के निशान मिलने की पुष्टि हुई है, जिसे कथित तौर पर घटना में इस्तेमाल किया गया था। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि बेल्ट पर मिले निशान और मृतका की गर्दन पर पाए गए चोटों का पैटर्न एक-दूसरे से मेल खाता है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक तौर पर रिपोर्ट की सामग्री सार्वजनिक नहीं की गई है।
AIIMS के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता ने बताया कि मेडिकल बोर्ड ने किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले मामले के हर पहलू की गहन और वैज्ञानिक तरीके से जांच की। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट तैयार करने के दौरान उपलब्ध राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक शोध, मेडिकल साहित्य और फॉरेंसिक मानकों का विस्तृत अध्ययन किया गया, ताकि जांच निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित रहे।
डॉ. गुप्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के चलते रिपोर्ट की किसी भी जानकारी का सार्वजनिक खुलासा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि बोर्ड ने अपनी वैज्ञानिक राय पूरी स्पष्टता के साथ सीबीआई और न्यायपालिका को उपलब्ध करा दी है।
इस रिपोर्ट को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि शुरुआती पोस्टमार्टम के दौरान मेडिकल बोर्ड के समक्ष कथित जिम बेल्ट प्रस्तुत नहीं की गई थी। ऐसे में पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गर्दन पर मिले घावों और बेल्ट के बीच कोई वैज्ञानिक संबंध स्थापित नहीं हो पाया था।
बाद में मृतका के परिजनों की मांग पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने AIIMS दिल्ली के विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड से दोबारा पोस्टमार्टम और वैज्ञानिक परीक्षण कराने के निर्देश दिए थे। जांच का मुख्य उद्देश्य यह स्पष्ट करना था कि मृतका की गर्दन पर मिले घाव कथित जिम बेल्ट से मेल खाते हैं या नहीं।
अब AIIMS की रिपोर्ट सीबीआई के पास पहुंचने के बाद मामले की जांच को नई दिशा मिलने की संभावना जताई जा रही है। आगे की कार्रवाई और निष्कर्ष जांच एजेंसी तथा न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे।