Summer express, बहादुरगढ़। इस बार मानसून ने बहादुरगढ़ में शुरुआत से ही जोरदार दस्तक दी है। जुलाई के पहले 10 दिनों में 119 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई है, जो पिछले 11 वर्षों में शुरुआती 10 दिनों के दौरान दूसरी सबसे अधिक बारिश मानी जा रही है। मौसम विभाग ने रविवार को भी बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में कुछ दिन पहले जलभराव की समस्या झेल चुके शहरवासियों की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है।
तीन दिन पहले हुई 78.6 मिलीमीटर बारिश ने शहर की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी थी। तेज बारिश के बाद शहर की कई प्रमुख सड़कें, बाजार और रिहायशी कॉलोनियां घंटों तक पानी में डूबी रहीं। कई स्थानों पर बारिश थमने के लगभग 24 घंटे बाद भी जलभराव बना रहा, जिससे लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
शहर में जल निकासी व्यवस्था पहले से ही सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात से पहले नालों की सफाई और सीवर सिस्टम दुरुस्त करने के दावे हर साल किए जाते हैं, लेकिन पहली तेज बारिश में ही पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है। नालों की समय पर सफाई नहीं होने और सीवर लाइनों की क्षमता कम होने के कारण बारिश का पानी तेजी से नहीं निकल पाता।
मौसम विभाग की ओर से फिर बारिश की संभावना जताए जाने के बाद प्रशासन की तैयारियों पर भी निगाहें टिकी हैं। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश होती है तो शहर के निचले इलाकों, मुख्य सड़कों और बाजारों में दोबारा जलभराव की स्थिति बनने की आशंका है। इससे यातायात प्रभावित हो सकता है और लोगों को दैनिक कार्यों में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2026 में जुलाई के पहले 10 दिनों में 119 मिमी से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। इससे पहले 2024 में इसी अवधि के दौरान 203.5 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई थी। वहीं 2025 में 98.7 मिमी, 2023 में 35 मिमी, 2022 में 75 मिमी, 2021 में 3.3 मिमी, 2020 में 94.8 मिमी, 2019 में 64 मिमी, 2018 में 11.8 मिमी, 2017 में 99.4 मिमी और 2016 में 40.7 मिमी बारिश दर्ज हुई थी।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मानसून की शुरुआती अच्छी बारिश धान की खेती के लिए लाभदायक साबित हो रही है। कृषि विभाग के अधिकारी सुनील राणा के अनुसार, समय पर हुई वर्षा से धान उत्पादक किसानों को सिंचाई में राहत मिलेगी और फसल की शुरुआती बढ़वार बेहतर होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि सक्रिय मानसून को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। वहीं प्रशासन को जल निकासी व्यवस्था मजबूत करने और संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने की जरूरत है, ताकि बारिश के दौरान जनजीवन पर कम से कम असर पड़े।