Summer express/मंडी/ धर्मवीर -:हिमाचल प्रदेश में खरीफ सीजन के दौरान मक्की की फसल पर फॉल आर्मीवॉर्म (Fall Armyworm) का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष मौसम की अनुकूल परिस्थितियों के कारण विशेष रूप से हाइब्रिड मक्की की फसलों पर इस कीट का हमला अधिक देखा जा रहा है। मंडी जिला सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है, जहां बड़ी संख्या में किसानों की फसल खतरे में है। प्रदेशभर में मक्की की खेती बड़े पैमाने पर होती है और इस कीट के बढ़ते असर ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
जानकारी के अनुसार फॉल आर्मीवॉर्म एक अत्यंत आक्रामक कीट है, जो सबसे पहले मक्की की पत्तियों को नुकसान पहुंचाता है। बाद में इसकी सुंडियां तने और भुट्टों के भीतर प्रवेश कर फसल को अंदर से नष्ट कर देती हैं। यही कारण है कि यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया जाए तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। पिछले कुछ वर्षों से यह कीट हिमाचल सहित देश के कई राज्यों में किसानों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
कृषि विज्ञान केंद्र, मंडी के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. पंकज सूद ने किसानों से नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करने की अपील की है। उनका कहना है कि फसल में पत्तियों पर छेद, सुंडियों की मौजूदगी या अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई दें तो तुरंत कृषि विभाग अथवा कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करना चाहिए, ताकि समय पर उचित सलाह और उपचार मिल सके।कीट नियंत्रण के लिए वैज्ञानिकों ने क्लोरेंट्रानिलिप्रोल (कोराजन) का 0.4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी है। इसके अलावा इमामेक्टिन बेंजोएट का प्रयोग भी प्रभावी माना गया है। यदि एक बार के छिड़काव के बाद भी प्रकोप बना रहे तो लगभग 15 दिनों के अंतराल पर दोबारा स्प्रे करने की सलाह दी गई है।विशेषज्ञों का कहना है कि रासायनिक नियंत्रण के साथ-साथ फनल ट्रैप का उपयोग भी लाभदायक है। इससे उड़ने वाले पतंगों की निगरानी और उनकी संख्या को कम किया जा सकता है, जिससे अंडों और लार्वा की बढ़ोतरी पर नियंत्रण संभव होता है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से समय रहते आवश्यक कदम उठाने की अपील की है, ताकि मक्की की फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सके।