Summer express, नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला परिसर से जुड़े धार्मिक विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने मामले को बेहद संवेदनशील बताते हुए दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की और कहा कि विवाद का समाधान सभी पक्षों के अधिकारों का सम्मान करते हुए किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर माना गया था।
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि अंतरिम व्यवस्था के तौर पर मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच परिसर के निकट किसी वैकल्पिक खुले स्थान पर नमाज अदा करने की व्यवस्था की जा सकती है, ताकि किसी भी पक्ष के अधिकार प्रभावित न हों। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले की नियमित सुनवाई की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर प्रतिदिन सुनवाई के लिए भी अदालत तैयार है।
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को भी निर्देश दिया कि शीर्ष अदालत की पूर्व अनुमति के बिना भोजशाला परिसर में किसी प्रकार का संरचनात्मक परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील मामला है और अदालत में बोले जाने वाले प्रत्येक शब्द का व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए सभी पक्षों को भाषा और प्रस्तुति में पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि फिलहाल लागू व्यवस्था को जारी रखते हुए मामले को जल्द उपयुक्त पीठ के समक्ष विस्तृत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और हुजैफा अहमदी ने दलीलें पेश करते हुए कहा कि वर्षों से शुक्रवार को नमाज अदा करने की व्यवस्था रही है और 1997 में प्रशासन द्वारा जारी आदेश के तहत शुक्रवार को नमाज तथा अन्य अवसरों पर हिंदू पक्ष को पूजा की अनुमति दी गई थी। उन्होंने अदालत से अंतरिम राहत की मांग भी की।
इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत का प्रयास ऐसा समाधान निकालना है जिससे किसी भी समुदाय के धार्मिक अधिकारों का हनन न हो। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि सरकार अंतरिम व्यवस्था पर सहयोग के लिए तैयार है।
अब इस बहुचर्चित मामले में केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार के जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट आगे की सुनवाई करेगा।