श्रीहरिकोटा।भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए अपना पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेज दिया। हैदराबाद स्थित निजी अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 रॉकेट ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफल उड़ान भरते हुए करीब 500 किलोमीटर ऊंची निम्न पृथ्वी कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में निर्धारित पेलोड स्थापित किए।
यह भारत की किसी निजी कंपनी द्वारा विकसित पहला ऑर्बिटल रॉकेट है, जिसने पहली ही उड़ान में सफलता हासिल कर देश के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि दर्ज की। “मिशन आगमन’ नाम से संचालित इस अभियान का उद्देश्य रॉकेट की प्रणोदन प्रणाली, मार्गदर्शन, नेविगेशन और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकों का परीक्षण करना था।
लगभग 22 मीटर लंबे विक्रम-1 की क्षमता 350 किलोग्राम तक के पेलोड को निम्न पृथ्वी कक्षा में स्थापित करने की है। इस मिशन के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जहां निजी कंपनियां स्वतंत्र रूप से ऑर्बिटल लॉन्च करने में सक्षम हैं।
निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की नई उड़ान
वर्ष 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद यह सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि विक्रम-1 की सफलता से भारत वैश्विक वाणिज्यिक प्रक्षेपण बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में मजबूत कदम रख सकेगा। यह उपलब्धि देश के अंतरिक्ष स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी मील का पत्थर साबित होगी।
नए अवसरों के द्वार खुलेंगे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन की सफलता के बाद स्काईरूट एयरोस्पेस के संस्थापक पवन कुमार चंदाना से फोन पर बात कर पूरी टीम को बधाई दी।उन्होंने इसे भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और देश के युवाओं की नवाचार क्षमता का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि निजी क्षेत्र के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगी।