नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र से पहले देश की राजनीति में गतिविधियां तेज हो गई हैं। केंद्र सरकार और विपक्षी दलों ने सत्र की रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। विपक्ष जहां महंगाई, बेरोजगारी, किसानों से जुड़े मुद्दों, कानून-व्यवस्था और विभिन्न नीतिगत फैसलों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
वहीं केंद्र सरकार अपनी उपलब्धियों और विकास योजनाओं को प्रमुखता से पेश करने की रणनीति बना रही है। विपक्षी दलों की बैठकों का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन के घटक दल संसद में एकजुट होकर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी कर रहे हैं। विपक्ष की कोशिश है कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए सरकार पर दबाव बनाया जाए।
विपक्षी दलों का कहना है कि संसद में आम लोगों से जुड़े विषयों पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए। बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, आवश्यक वस्तुओं की कीमतें, जांच एजेंसियों के कथित इस्तेमाल और संघीय ढांचे से जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्ष सरकार को घेर सकता है।
इसके अलावा विभिन्न राज्यों के राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे भी संसद में उठाए जाने की संभावना है। विपक्षी दलों के नेता सत्र से पहले आपसी तालमेल मजबूत करने पर भी काम कर रहे हैं, ताकि सदन में एक साझा रणनीति के साथ सरकार का सामना किया जा सके। दूसरी ओर केंद्र सरकार ने भी संसद सत्र को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। सरकार का प्रयास रहेगा कि महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराया जाए और अपनी नीतियों तथा योजनाओं को सदन के माध्यम से जनता तक पहुंचाया जाए। सत्तारूढ़ दल विपक्ष के आरोपों का जवाब देने और सरकार के कामकाज को सामने रखने की तैयारी कर रहा है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष को सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करना चाहिए।
सर्वदलीय बैठक पर रहेगी नजर
संसद सत्र से पहले होने वाली सर्वदलीय बैठक में सरकार और विपक्ष के बीच सदन की कार्यवाही को लेकर सहमति बनाने की कोशिश होगी। इस बैठक में विभिन्न दल अपने मुद्दे और प्राथमिकताएं रखेंगे। राजनीतिक माहौल को देखते हुए मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। जहां सरकार विधायी कामकाज को आगे बढ़ाने पर जोर देगी, वहीं विपक्ष सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए विभिन्न मुद्दों पर दबाव बनाने की कोशिश करेगा।