Summer express/चिंतपूर्णी, विकास-: हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर में एक बार फिर श्रद्धा, विश्वास और भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। राजस्थान के हनुमानगढ़ से पहुंचे एक परिवार ने अपनी मनोकामना पूरी होने पर माता के चरणों में अनोखे अंदाज में आभार व्यक्त किया। परिवार के बेटे और बहू ने मंदिर की ओर दंडवत प्रणाम करते हुए यात्रा की, जबकि अन्य सदस्य नंगे पैर उनके साथ चलते हुए माता का गुणगान करते रहे। इस भावनात्मक दृश्य ने मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को भी भावुक कर दिया।
परिवार की सदस्य पिंकी बब्बर ने बताया कि उनकी पोती गंभीर रूप से बीमार थी और परिवार लगातार उसकी सलामती के लिए माता चिंतपूर्णी से प्रार्थना कर रहा था। उनका कहना है कि माता की कृपा से बच्ची की तबीयत में सुधार हुआ और वह अब स्वस्थ है। इसके अलावा परिवार की अन्य मनोकामनाएं भी पूरी हुईं, जिसके बाद उन्होंने माता के दरबार में विशेष रूप से आकर धन्यवाद अर्पित करने का संकल्प लिया।मन्नत पूरी होने के बाद परिवार ने दंडवत यात्रा का संकल्प निभाया। बेटे और बहू सड़क पर लेट-लेटकर आगे बढ़ते रहे, जबकि पिंकी बब्बर और अन्य सदस्य नंगे पैर उनके साथ चलते हुए माता का जयकारा लगाते रहे। यात्रा के दौरान पिंकी की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि माता के आशीर्वाद के सामने यह कठिन तपस्या बहुत छोटी है और सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती।चिंतपूर्णी बाजार से गुजरते समय इस अनूठी भक्ति यात्रा को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई। लोगों ने परिवार का उत्साह बढ़ाते हुए “जय माता दी” के जयकारे लगाए और माता की महिमा का गुणगान किया। कई श्रद्धालुओं ने इसे अटूट विश्वास और समर्पण का प्रतीक बताया। मंदिर परिसर में मौजूद लोगों का कहना था कि श्रद्धा और विश्वास के साथ माता के दरबार में आने वाला हर भक्त आत्मिक शांति और नई उम्मीद लेकर लौटता है। यह दृश्य वहां उपस्थित लोगों के लिए लंबे समय तक यादगार बना रहा।