एजेंसी | नई दिल्ली
जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन के आगे आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। यह फैसला देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन व सीजेपी के नेतृत्व में जारी प्रदर्शन के बीच आया।
इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने जश्न मनाया। सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा- वे कहते थे, इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।
वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी ने शनिवार को सरकार के साथ बैठक के बाद आंदोलन खत्म करने की घोषणा की। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह के साथ प्रवक्ता सौरभ दास, आशुतोष रांका ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका ऐलान किया। सौरभ दास ने कहा कि जंतर-मंतर मौजूद सभी प्रदर्शनकारी अब अपने घर लौट जाएं। रांका ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में सरकार से 3 बार बातचीत हुई। हमारी तीनों मांगें मान ली गई हैं। इनमें धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, सभी केस वापस लिए जाएं व नीट पीड़ितों को एक करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए शामिल हैं।
वहीं, प्रधान ने अपने पत्र में कहा कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं से वह बेहद दुखी हैं और जंतर-मंतर व देशभर में बने हालात को देखते हुए उन्होंने यह कदम उठाया है, ताकि राष्ट्रविरोधी ताकतें स्थिति का लाभ न उठा सकें, देश की एकता बनी रहे और विद्यार्थियों का भविष्य कानूनी उलझनों में न फंसे। उन्होंने प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार भी जताया।
आंदोलन के दौरान मंच से परीक्षा विवाद और दबाव के बीच आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों का भी उल्लेख किया गया।